रामनगर। उत्तराखंड के रामनगर स्थित पूछड़ी नई बस्ती में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए हैं। प्रशासन की ओर से दो चरणों में चलाए गए अभियान के तहत कुल 133 परिवारों के मकानों को ध्वस्त किया गया है। इस कार्रवाई के बाद जहां प्रभावित परिवारों के सामने रहने और पुनर्वास की चुनौती खड़ी हो गई है, वहीं इसका असर आने वाले चुनावों के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ने की चर्चा शुरू हो गई है।
जानकारी के अनुसार, पूछड़ी नई बस्ती में अतिक्रमण हटाने का अभियान दो चरणों में चलाया गया। पहले चरण में पिछले वर्ष प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 52 मकानों को ध्वस्त किया था। इसके बाद शनिवार को दूसरे चरण की कार्रवाई की गई, जिसमें 81 और मकानों को तोड़ा गया। इस तरह दोनों चरणों में कुल 133 परिवारों को अपने आशियाने गंवाने पड़े हैं।
दूसरी जगह शिफ्ट होने को मजबूर होंगे प्रभावित परिवार
कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के सामने अब रहने के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशने की चुनौती है। माना जा रहा है कि इनमें से कई परिवार रामनगर के अन्य इलाकों या आसपास के क्षेत्रों में शिफ्ट हो सकते हैं। ऐसे में जिस क्षेत्र में ये परिवार लंबे समय से रह रहे थे, वहां उनकी आबादी और स्थानीय मतदाताओं की संख्या में बदलाव देखने को मिल सकता है।
चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है असर
इस कार्रवाई को लेकर अब स्थानीय राजनीति में भी चर्चाएं तेज हो सकती हैं। दरअसल, किसी भी चुनाव में स्थानीय मतदाताओं की संख्या और उनका भौगोलिक वितरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पूछड़ी नई बस्ती से 133 परिवारों के हटने के बाद आगामी चुनावों में स्थानीय नेताओं के पारंपरिक जनाधार और वोटों के समीकरण पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
यदि प्रत्येक प्रभावित परिवार में औसतन चार मतदाता भी माने जाएं, तो यह संख्या 532 से अधिक हो सकती है। हालांकि, यह केवल अनुमानित आंकड़ा है और वास्तविक मतदाताओं की संख्या अलग हो सकती है।
फिलहाल इस कार्रवाई का सबसे बड़ा असर उन परिवारों पर पड़ा है, जिन्हें अपने घर छोड़ने पड़े हैं। आने वाले समय में इन परिवारों का पुनर्वास कहां होता है और वे किन क्षेत्रों में जाकर बसते हैं, यह स्थानीय सामाजिक और चुनावी परिस्थितियों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।





