बदरीनाथ हेलीकॉप्टर हादसा: 60 सदस्यीय रेस्क्यू टीम ने रातभर जंगल में बनाया रास्ता, सुबह 4 बजे निकाले गए सभी छह शव; बेहद कठिन रहा बचाव अभियान

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चमोली। बदरीनाथ धाम से देहरादून जा रहे ट्रांस भारत एविएशन के हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद रेस्क्यू अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में चलाया गया। बदरीनाथ और जोशीमठ के बीच पांडुकेश्वर की दुर्गम पहाड़ियों में हुए इस हादसे में जान गंवाने वाले दिल्ली निवासी पायलट और कर्नाटक के पांच यात्रियों के शवों को घटनास्थल से बाहर निकालने के लिए बचाव दल को रातभर कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। करीब 60 सदस्यों की टीम ने घने जंगल, दुर्गम पहाड़ी रास्तों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच अभियान चलाकर तड़के करीब चार बजे सभी शवों को चांई गांव तक पहुंचाया।

दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगल के बीच चला रेस्क्यू अभियान

हादसे के बाद घटनास्थल तक पहुंचना और वहां से शवों को सुरक्षित बाहर निकालना बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। दुर्घटनास्थल पांडुकेश्वर की पहाड़ियों के बीच ऐसे दुर्गम क्षेत्र में था, जहां सामान्य रास्तों से पहुंचना आसान नहीं था। पहाड़ी ढलानों और घने जंगल के कारण रेस्क्यू टीम को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

इसके बावजूद बचाव अभियान में जुटे करीब 60 सदस्यों ने हार नहीं मानी। टीम ने जंगल के बीच से रास्ता तैयार किया और बेहद सावधानी के साथ शवों को घटनास्थल से बाहर निकालने का काम शुरू किया।

रातभर जंगल में रास्ता बनाकर निकाले गए शव

रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती शवों को दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र से चांई गांव तक पहुंचाने की थी। इसके लिए बचावकर्मियों को रातभर जंगल में रहकर रास्ता बनाना पड़ा। सीमित दृश्यता और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच टीम ने लगातार अभियान जारी रखा।

कड़ी मेहनत और समन्वय के बाद तड़के करीब चार बजे सभी छह शवों को चांई गांव तक पहुंचाया जा सका। इस पूरे अभियान में रेस्क्यू टीम के सदस्यों को कई घंटों तक बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ा।

छह लोगों की मौत से शोक में क्षेत्र

इस दर्दनाक हादसे में दिल्ली निवासी पायलट समेत कर्नाटक के पांच यात्रियों की जान चली गई। हादसे ने एक बार फिर उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई सेवाओं की सुरक्षा और आपातकालीन बचाव व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

दुर्घटना के बाद जिस तरह करीब 60 सदस्यीय टीम ने रातभर जंगल में अभियान चलाकर शवों को बाहर निकाला, वह पर्वतीय क्षेत्रों में रेस्क्यू ऑपरेशन की कठिनाइयों को दर्शाता है।

नोट: हादसे के कारणों और तकनीकी पहलुओं की पुष्टि जांच रिपोर्ट के आधार पर ही की जा सकेगी।