उत्तराखंड: 2016 में रोजगार की तलाश में घर से निकला युवक, 2023 में मिला था शव… 2026 में एक तस्वीर ने खोला 10 साल पुराने इंतजार का दर्दनाक सच

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ऊधम सिंह नगर। उत्तराखंड से एक ऐसी मार्मिक घटना सामने आई है जिसने पूरे परिवार के वर्षों पुराने इंतजार को एक दर्दनाक सच्चाई में बदल दिया। वर्ष 2016 में रोजगार की तलाश में घर से निकले युवक का परिवार लगभग दस वर्षों तक उसके लौटने की उम्मीद लगाए बैठा रहा। लेकिन नियति ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। हाल ही में एक तस्वीर ने वह सच सामने ला दिया, जिसने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। जिस बेटे के घर लौटने की उम्मीद अभी भी जिंदा थी, वह दरअसल तीन साल पहले ही इस दुनिया को अलविदा कह चुका था।

यह मामला चमोली जिले के गैरसैंण क्षेत्र के देवीपुरी गांव निवासी हयात सिंह उर्फ पप्पू नेगी का है। वर्ष 2016 में पप्पू नेगी बेहतर रोजगार की तलाश में घर से निकले थे। परिवार के अनुसार वह होटल में काम करते थे, लेकिन कुछ समय बाद उनका परिजनों से संपर्क पूरी तरह टूट गया। परिवार ने रिश्तेदारों, परिचितों और विभिन्न स्थानों पर उनकी तलाश की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल सका। समय बीतता गया, लेकिन परिजन इस उम्मीद में रहे कि एक दिन वह जरूर घर लौटेंगे।

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इधर, 26 जून 2023 को ऊधम सिंह नगर जिले के बाजपुर क्षेत्र में बरहैनी-बन्नाखेड़ा मार्ग पर लगभग 30 वर्षीय एक युवक का शव बरामद हुआ था। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया और पहचान के लिए सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कीं, लेकिन काफी प्रयासों के बावजूद मृतक की शिनाख्त नहीं हो सकी। इसके बाद वह शव सरकारी रिकॉर्ड में केवल एक “अज्ञात शव” बनकर रह गया। लगभग तीन वर्षों तक यह मामला अनसुलझा ही पड़ा रहा।

कहानी में नया मोड़ तब आया जब बन्नाखेड़ा चौकी प्रभारी सुरेंद्र सिंह खड़ायत पुराने लंबित मामलों की समीक्षा कर रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर 2023 में मिले अज्ञात शव की फाइल पर पड़ी। मामले को सुलझाने के उद्देश्य से उन्होंने मृतक की तस्वीर अपने परिचितों और गैरसैंण क्षेत्र के लोगों के साथ साझा की। तस्वीर धीरे-धीरे गांव तक पहुंची और वहां परिजनों ने तस्वीर देखते ही युवक की पहचान पप्पू नेगी के रूप में कर ली।

पहचान की पुष्टि होने के बाद रविवार को पप्पू नेगी के भाई खिलाफ सिंह, तहेरे भाई कलम सिंह और भरत सिंह, चाचा प्रदीप सिंह तथा बहनोई पुष्कर सिंह बाजपुर कोतवाली पहुंचे। पुलिस द्वारा दिखाई गई तस्वीर को देखते ही वर्षों से संजोई उम्मीदें टूट गईं। जिस बेटे और भाई के लौटने का परिवार वर्षों से इंतजार कर रहा था, वह अब केवल एक तस्वीर और यादों में ही शेष रह गया था। परिजनों की आंखें नम हो गईं और पूरे परिवार में शोक की लहर दौड़ गई।

परिजनों ने पुलिस को बताया कि पप्पू नेगी शराब का अधिक सेवन करते थे। घर छोड़ने के बाद उन्होंने परिवार से कोई संपर्क नहीं किया और धीरे-धीरे उनका कोई सुराग भी नहीं मिल पाया। परिवार लगातार उनकी तलाश करता रहा, लेकिन उन्हें कभी यह अंदाजा नहीं था कि उनका अपनों से बिछड़ना हमेशा के लिए हो चुका है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2023 में मिले शव की पहचान नहीं होने के कारण मामला लंबित था। अब तीन साल बाद तस्वीर के माध्यम से मृतक की शिनाख्त होने के बाद पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज एक अनजान शव को आखिरकार उसका नाम, उसका परिवार और उसकी पहचान मिल गई। इसके साथ ही लगभग दस वर्षों से अपने बेटे की राह देख रहे परिवार के इंतजार का अंत तो हुआ, लेकिन यह अंत बेहद दर्दनाक साबित हुआ।

यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि पुलिस की सतर्कता, पुराने मामलों की गंभीर समीक्षा और छोटी-सी कोशिश भी वर्षों पुराने रहस्यों से पर्दा उठा सकती है। हालांकि इस मामले में सच्चाई सामने आने से परिवार को अपने लापता सदस्य के बारे में जानकारी तो मिल गई, लेकिन यह जानकारी उनके लिए जीवनभर का दर्द बन गई।