रामनगर/नैनीताल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को रामनगर में धनगढ़ी पुल के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस और सांसद राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन्हें “एक पार्टी के युवराज” कहकर संबोधित किया और उत्तराखंड दौरे को लेकर कई सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि वे अल्मोड़ा नहीं जा सकते थे तो फिर देहरादून का कार्यक्रम भी रद्द करने की क्या आवश्यकता थी। उनके इस कदम से यह साफ होता है कि कांग्रेस का उत्तराखंड से कोई वास्तविक जुड़ाव नहीं है।
धनगढ़ी पुल के लोकार्पण समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कांग्रेस नेताओं की सक्रियता केवल चुनाव के समय ही दिखाई देती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह रामनगर में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कारण पर्यटन सीजन आता है, उसी प्रकार कांग्रेस के लिए भी केवल चुनाव के समय “चुनाव पर्यटन” का मौसम शुरू होता है। चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस नेताओं को उत्तराखंड और यहां की जनता की समस्याएं याद आने लगती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री का उत्तराखंड के प्रति विशेष लगाव है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री अब तक 28 बार उत्तराखंड का दौरा कर चुके हैं और भविष्य में भी उनके कई प्रस्तावित दौरे तय हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार लगातार उत्तराखंड के विकास, आधारभूत संरचना को मजबूत करने और जनता के हित में विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही हैं।
राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका कार्यक्रम अचानक बदल जाना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश अल्मोड़ा जाना संभव नहीं था तो देहरादून का दौरा भी रद्द करने की आवश्यकता नहीं थी। इससे कांग्रेस की प्राथमिकताओं पर प्रश्नचिह्न लगते हैं।
इस दौरान मुख्यमंत्री से आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी सवाल पूछा गया। जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव अपने निर्धारित समय पर ही कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अपनी तैयारियों में जुटा हुआ है और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही पूरे लोकतांत्रिक और पारदर्शी तरीके से चुनाव संपन्न होंगे।
मुख्यमंत्री धामी के इन बयानों को प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा के बीच बढ़ते सियासी आरोप-प्रत्यारोप के रूप में देखा जा रहा है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है और आने वाले समय में इसके और अधिक तीखे होने की संभावना जताई जा रही है।




