देहरादून। उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से सीआईएमएस (CIMS) के तीन दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव ‘धरोहर-2026’ का सोमवार को शुभारंभ हो गया। इस महोत्सव में प्रदेश की लोक परंपराओं, संगीत, नृत्य और कला की विविध रंगत देखने को मिलेगी। इस वर्ष महोत्सव का आयोजन ‘नवरंग’ थीम पर किया जा रहा है, जिसके माध्यम से भारतीय संस्कृति और उत्तराखंड की पारंपरिक विरासत के विभिन्न रंगों को प्रदर्शित किया जाएगा।
महोत्सव के दौरान उत्तराखंड की लोक संस्कृति को विशेष महत्व दिया जाएगा। इसमें प्रदेश के लोक गायकों और कलाकारों के साथ संस्थान के छात्र-छात्राएं भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। लोकगीतों, पारंपरिक नृत्यों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान, रीति-रिवाजों और लोक परंपराओं को मंच पर जीवंत किया जाएगा।
‘नवरंग’ थीम पर आधारित होंगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
इस वर्ष ‘धरोहर’ महोत्सव की थीम ‘नवरंग’ रखी गई है। इसके तहत संगीत, नृत्य और कला के विभिन्न स्वरूपों को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में दर्शकों को सांस्कृतिक विविधता और रचनात्मक प्रतिभा का संगम देखने को मिलेगा।
महोत्सव में छात्र-छात्राओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलने के साथ ही उन्हें प्रदेश के लोक कलाकारों और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का भी मौका मिलेगा।
लोक संस्कृति और युवा प्रतिभाओं का होगा संगम
‘धरोहर-2026’ का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करना ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना भी है। ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी रचनात्मक क्षमता दिखाने और स्थानीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण के प्रति जागरूक होने का अवसर प्रदान करते हैं।
तीन दिवसीय इस महोत्सव के माध्यम से उत्तराखंड की लोक विरासत और आधुनिक पीढ़ी की प्रतिभा एक साझा मंच पर नजर आएगी। संगीत, नृत्य और कला के विविध रंगों से सजा यह आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।





