मिठाइयों के आकार में तैयार कर रहे सुगंधित कैंडल और दीये, श्रीनगर के परिवार ने अनोखी पहल से शुरू किया स्वरोजगार

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श्रीनगर गढ़वाल। हुनर, रचनात्मक सोच और कुछ नया करने का जज्बा हो तो छोटे स्तर पर भी स्वरोजगार की नई राह बनाई जा सकती है। इसकी मिसाल श्रीनगर गढ़वाल के सुनील ढौंडियाल और उनका परिवार पेश कर रहा है। परिवार ने अपनी भांजी कृति धस्माना की रचनात्मक सोच को स्वरोजगार का रूप देते हुए दीपावली के लिए आकर्षक और अनूठे उत्पाद तैयार करने शुरू किए हैं। मिठाइयों की तरह दिखने वाली इन सुगंधित कैंडल और दीयों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

परिवार की इस पहल की खासियत यह है कि यहां पारंपरिक मिठाइयों को कैंडल और दीयों का आकर्षक रूप दिया जा रहा है। घर पर ही काजू कतली, बूंदी के लड्डू और गोल गप्पे समेत विभिन्न खाद्य पदार्थों के आकार में सुगंधित कैंडल और दीये तैयार किए जा रहे हैं। देखने में बिल्कुल आकर्षक मिठाइयों जैसे नजर आने वाले ये उत्पाद दीपावली की सजावट और उपहार देने के लिए एक अलग विकल्प बनकर सामने आ रहे हैं।

भांजी की रचनात्मक सोच बनी स्वरोजगार की वजह

सुनील ढौंडियाल के परिवार ने अपनी भांजी कृति धस्माना की कल्पनाशीलता को व्यवसायिक अवसर में बदलने का प्रयास किया है। कृति की रचनात्मक सोच से शुरू हुआ यह काम अब परिवार के सामूहिक प्रयास से आगे बढ़ रहा है। परिवार घर पर ही इन उत्पादों को तैयार कर रहा है, जिससे स्वरोजगार की एक नई राह भी खुली है।

इस पहल की खास बात यह है कि इसमें सामान्य कैंडल और दीयों से हटकर कुछ नया करने का प्रयास किया गया है। मिठाइयों के आकार और सुगंध का मेल इन उत्पादों को खास बनाता है।

दिल्ली और देहरादून तक पहुंची उत्पादों की मांग

परिवार की इस रचनात्मक पहल को बाजार से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। दीपावली के अवसर पर दिल्ली और देहरादून से इन उत्पादों के ऑर्डर मिले हैं, जिनकी आपूर्ति भी समय पर पूरी की जा चुकी है। इससे परिवार को अपने उत्पादों के प्रति लोगों की रुचि और बाजार में संभावनाओं का अंदाजा मिला है।

छोटे प्रयास से स्वरोजगार की बड़ी उम्मीद

सुनील ढौंडियाल और उनके परिवार की यह पहल बताती है कि स्वरोजगार के लिए हमेशा बड़े निवेश या बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। नई सोच, पारिवारिक सहयोग और रचनात्मक हुनर के जरिए घर से भी व्यवसाय शुरू किया जा सकता है।

दीपावली जैसे त्योहारों पर सजावटी और आकर्षक उत्पादों की मांग को देखते हुए परिवार की यह कोशिश स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की एक प्रेरक मिसाल बन रही है।