हर्बल कुंभ में मंत्रियों का भरोसा: हर्बल क्रांति से बदलेगी उत्तराखंड की तस्वीर, थमेगा पलायन और समृद्ध होंगे पहाड़ के गांव

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पौड़ी गढ़वाल/ऋषिकेश/हरिद्वार। उत्तराखंड में पलायन की चुनौती से निपटने और पर्वतीय क्षेत्रों की आर्थिकी को मजबूत बनाने के लिए जड़ी-बूटियों एवं औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। पारंपरिक खेती के साथ हर्बल खेती को जोड़कर ग्रामीणों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। राज्य सरकार उत्तराखंड को हर्बल स्टेट के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयासरत है। प्रथम हर्बल कुंभ एवं द्वितीय धन्वंतरि महोत्सव में शामिल मंत्रियों ने भी इस दिशा में अपनी प्रतिबद्धता जताई।

महोत्सव के दूसरे दिन मालागांव में आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी, ग्रामीण विकास एवं एमएसएमई मंत्री भरत चौधरी तथा बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने हर्बल खेती की संभावनाओं पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जलवायु और प्राकृतिक परिस्थितियां औषधीय पौधों की खेती के लिए अनुकूल अवसर प्रदान करती हैं। इन संभावनाओं का योजनाबद्ध तरीके से उपयोग कर पहाड़ के गांवों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है।

हर्बल खेती से गांवों में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि पर्वतीय क्षेत्रों में जड़ी-बूटियों और औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित करने से किसानों को आय के नए विकल्प मिल सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी विकसित होंगे। खेती को बाजार और प्रसंस्करण से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जाएं तो इसका लाभ छोटे और सीमांत किसानों तक पहुंच सकता है।

पतंजलि के प्रयासों से कृषि नवाचार को मिल सकती है गति

मंत्रियों ने हर्बल क्षेत्र में पतंजलि के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताते हुए उम्मीद जताई कि संस्थान के सहयोग से औषधीय खेती, कृषि नवाचार और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। इस तरह के प्रयास उत्तराखंड की पारंपरिक वनस्पति संपदा को नई पहचान दिलाने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक हो सकते हैं।

प्रकृति, परंपरा और विकास का संगम

पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण ने हर्बल कुंभ को कृषि नवाचार और औषधीय परंपराओं को आगे बढ़ाने का मंच बताया। उन्होंने श्री धन्वंतरि धाम को प्रकृति और विकास के संगम के रूप में प्रस्तुत किया। महोत्सव के माध्यम से हर्बल क्षेत्र की संभावनाओं, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक कृषि नवाचारों पर चर्चा को प्रोत्साहन मिला।

कार्यक्रम में व्यक्त विचारों के अनुसार, उत्तराखंड में हर्बल खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देना पहाड़ों की आर्थिकी को मजबूत करने और पलायन की समस्या से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हो सकती है।