पिथौरागढ़ पॉक्सो मामले में डीएनए जांच से बड़ा खुलासा, शिक्षक नहीं बल्कि किशोर निकला मृत नवजात का जैविक पिता

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पिथौरागढ़। अस्कोट के चर्चित पॉक्सो प्रकरण में डीएनए जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले की विवेचना की दिशा बदल गई है। अब तक इस मामले में नामजद शिक्षक को आरोपी मानते हुए न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका था, लेकिन वैज्ञानिक जांच में मृत नवजात शिशु का जैविक पिता कोई अन्य व्यक्ति पाया गया। आगे की विवेचना में एक विधि-विवादित किशोर के नवजात का जैविक पिता होने की पुष्टि हुई है। डीएनए रिपोर्ट के इस खुलासे के बाद मामले में जांच का दायरा बदल गया है।

जानकारी के अनुसार, कोतवाली अस्कोट में योगेश कुमार पांडे के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 65(1) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले की प्रारंभिक विवेचना पूरी करने के बाद 24 जुलाई 2026 को आरोपी के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया था।

डीएनए जांच के लिए भेजे गए थे नमूने

मामले की जांच के दौरान पीड़िता द्वारा जन्म दिए गए मृत नवजात शिशु के जैविक नमूने एकत्र किए गए थे। इन नमूनों को डीएनए परीक्षण के लिए क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला, रुद्रपुर भेजा गया था। पुलिस को वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट का इंतजार था, ताकि नवजात के जैविक पिता की पहचान से जुड़े तथ्यों की पुष्टि हो सके।

वैज्ञानिक रिपोर्ट के बाद बदली विवेचना की दिशा

डीएनए परीक्षण रिपोर्ट सामने आने के बाद पहले से नामजद आरोपी और मृत नवजात के जैविक पिता को लेकर महत्वपूर्ण अंतर सामने आया। रिपोर्ट में नवजात का जैविक पिता कोई अन्य व्यक्ति पाया गया। इसके बाद पुलिस ने मामले में आगे की विवेचना की और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर एक विधि-विवादित किशोर के जैविक पिता होने की पुष्टि की।

इस खुलासे के बाद अस्कोट का यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब जांच में डीएनए रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने पर ध्यान दिया जा रहा है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई विवेचना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।