उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस से पहले फिर तेज हुई रानीखेत को जिला बनाने की मांग, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

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रानीखेत। उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस नजदीक आते ही रानीखेत को पृथक जिला बनाने की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। कभी राज्य की सबसे बड़ी तहसीलों में शामिल रहे रानीखेत को जिला बनाने के लिए क्षेत्रीय विकास मोर्चा ने आवाज बुलंद की है। मोर्चा ने राज्य स्थापना की वर्षगांठ के अवसर पर सरकार से नए जनपदों के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग की है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भी भेजा गया है।

क्षेत्रीय विकास मोर्चा के बैनर तले नागरिकों के एक शिष्टमंडल ने संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी से मुलाकात की और उन्हें मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि रानीखेत को पृथक जिला बनाने की मांग वर्ष 1955 से लगातार उठाई जा रही है, लेकिन इतने लंबे समय बाद भी यह मांग पूरी नहीं हो सकी है।

ज्ञापन में कहा गया कि रानीखेत का ब्रिटिश काल से ही ऐतिहासिक और सामरिक महत्व रहा है। यहां कुमाऊं रेजिमेंट और एसएसबी का मुख्यालय, उद्यान निदेशालय तथा जीपीओ सहित कई महत्वपूर्ण कार्यालय संचालित हैं। इसके अलावा जिला मुख्यालय के लिए आवश्यक अन्य सरकारी कार्यालय स्थापित करने के लिहाज से पर्याप्त सरकारी भूमि भी उपलब्ध है। ऐसे में रानीखेत को जिला बनाने के लिए जरूरी आधारभूत सुविधाएं और संसाधन मौजूद हैं।

मोर्चा के सदस्यों ने कहा कि पूर्व में प्रदेश के कई मुख्यमंत्रियों की ओर से रानीखेत को जिला बनाने की घोषणा भी की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद आज तक नया जनपद अस्तित्व में नहीं आ सका। इससे क्षेत्रवासियों की वर्षों पुरानी उम्मीद अधूरी बनी हुई है।

ज्ञापन सौंपने वालों में नामित कैंट बोर्ड सदस्य मोहन नेगी, अधिवक्ता दिनेश तिवारी, राज पांडे, खजान पांडे और आशीष पांडे सहित अन्य लोग शामिल रहे।