उत्तराखंड के बागेश्वर में भारी भूस्खलन से मची हलचल, शंभू नदी में बनी 800 मीटर लंबी झील; कुंवारी गांव पर मंडराया खतरा

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बागेश्वर। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में लगातार हो रहे भूस्खलन ने कुंवारी गांव और आसपास के इलाकों की चिंता बढ़ा दी है। कपकोट तहसील के कुंवारी गांव में पहाड़ी दरकने से शंभू नदी का प्रवाह बाधित हो गया है, जिसके चलते नदी में करीब 800 मीटर लंबी झील बन गई है। नदी के रास्ते में मलबा, बड़े बोल्डर और पेड़ गिरने से स्थिति गंभीर बनी हुई है।

पहाड़ी दरकने से नदी का रास्ता हुआ बाधित

कुंवारी गांव में शंभू नदी के दाहिने हिस्से की पहाड़ी लगातार सक्रिय बनी हुई है। पहाड़ी से मलबा और बोल्डर खिसककर सीधे नदी में गिर रहे हैं। इसके साथ पेड़ों के गिरने से भी नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हुआ है।

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लगातार मलबा गिरने के कारण नदी का पानी एक स्थान पर जमा होने लगा और देखते ही देखते करीब 800 मीटर लंबी झील का निर्माण हो गया। इससे आसपास के क्षेत्रों में खतरे की आशंका बढ़ गई है।

झील से पानी निकालने का प्रयास जारी

वर्तमान में झील में जमा पानी की निकासी की जा रही है, ताकि नदी का प्रवाह सामान्य किया जा सके और जलस्तर बढ़ने से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरे को कम किया जा सके। हालांकि, जिस पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन हो रहा है, उसकी सक्रियता अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।

भूस्खलन क्षेत्र की सक्रियता बनी चुनौती

सबसे बड़ी चिंता यह है कि भूस्खलन का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है। यदि पहाड़ी से दोबारा बड़ी मात्रा में मलबा और बोल्डर नदी में गिरते हैं तो नदी का प्रवाह फिर बाधित हो सकता है और झील का आकार बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।

ऐसे में कुंवारी गांव और नदी के आसपास रहने वाले लोगों के लिए स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी हो गया है। प्रशासन और संबंधित विभाग भूस्खलन क्षेत्र की स्थिति पर निगरानी बनाए हुए हैं।

गांव में बढ़ी चिंता

शंभू नदी में बनी झील और लगातार सक्रिय भूस्खलन ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। पहाड़ी क्षेत्रों में इस तरह नदी का रास्ता अवरुद्ध होने पर अचानक पानी का बहाव बढ़ने का खतरा रहता है। यही वजह है कि झील से पानी की निकासी और भूस्खलन क्षेत्र की निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है।

फिलहाल पानी की निकासी की जा रही है, लेकिन भूस्खलन क्षेत्र सक्रिय होने के कारण खतरा पूरी तरह टला नहीं है। आने वाले समय में पहाड़ी की गतिविधि और नदी के जलस्तर पर स्थिति निर्भर करेगी।