Delhi-Doon Expressway Accident: न पहरा काम आया और न सुरक्षा इंतजाम, अब तक 18 हादसों ने मचाया कोहराम

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देहरादून। देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर मोहब्बेवाला-आशारोड़ी के बीच करीब दो किलोमीटर का हिस्सा लगातार हो रहे सड़क हादसों के कारण जानलेवा साबित होता जा रहा है। यहां एक के बाद एक पलटते ट्रक, वाहनों की टक्कर और दुर्घटनाओं में जाती जानें सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। हर हादसे के बाद संबंधित विभागों के अधिकारी मौके का निरीक्षण करते हैं, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा होती है और नए इंतजाम करने के निर्देश दिए जाते हैं। कुछ समय तक सतर्कता भी दिखाई देती है, लेकिन इसके बाद फिर कोई नया हादसा सामने आ जाता है।

बुधवार को इसी मार्ग पर एक ट्रक के कार के ऊपर पलटने से चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। साथ ही यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि आखिर तमाम निगरानी और सुरक्षा उपायों के बावजूद इस हिस्से में दुर्घटनाओं पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है। अब तक यहां 18 हादसे हो चुके हैं, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।

लगातार हादसों के बाद भी नहीं बदली स्थिति

मोहब्बेवाला से आशारोड़ी के बीच का यह हिस्सा लंबे समय से दुर्घटनाओं को लेकर चर्चा में है। यहां भारी वाहनों की आवाजाही, तेज रफ्तार और सड़क पर वाहनों के नियंत्रण से जुड़ी परिस्थितियां हादसों की आशंका बढ़ाती रही हैं। लगातार दुर्घटनाओं के बावजूद इस मार्ग पर सफर करने वाले वाहन चालकों और स्थानीय लोगों की चिंता कम नहीं हुई है।

हर बड़ी दुर्घटना के बाद प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की सक्रियता बढ़ जाती है। मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया जाता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उपायों पर चर्चा होती है। हालांकि, कुछ समय बाद हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोगों के बीच भी सुरक्षा इंतजामों की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

24 घंटे निगरानी से लेकर रंबल स्ट्रिप तक के इंतजाम

लगातार हो रहे हादसों को रोकने के लिए इस संवेदनशील हिस्से में कई तरह के सुरक्षा उपाय किए गए हैं। मार्ग पर 24 घंटे निगरानी रखने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा वाहन चालकों को सतर्क करने के लिए रंबल स्ट्रिप लगाई गई हैं। जिगजैग बैरिकेडिंग के माध्यम से वाहनों की गति नियंत्रित करने और यातायात को व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया है।

सड़क किनारे गति सीमा के संकेतक भी लगाए गए हैं, ताकि चालक निर्धारित रफ्तार में वाहन चलाएं। इसके साथ ही तेज गति से चलने वाले वाहनों पर नजर रखने के लिए स्पीड लिमिट कैमरे लगाने की कवायद भी चल रही है। इन सभी प्रयासों का उद्देश्य दुर्घटनाओं की आशंका को कम करना और संवेदनशील हिस्से से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना है।

हनुमान मंदिर की नींव भी रखी गई

इस मार्ग पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बीच स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था और भावनाओं को ध्यान में रखते हुए हनुमान मंदिर की नींव भी रखी जा चुकी है। स्थानीय लोगों की मान्यता और आस्था का सम्मान करते हुए यह पहल की गई। हालांकि, इसके बावजूद सड़क पर दुर्घटनाओं का सिलसिला थम नहीं पाया है।

स्थानीय लोगों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। उनका मानना है कि केवल हादसे के बाद सक्रियता दिखाने के बजाय स्थायी और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी परिवार को इस तरह अपनों को खोने का दर्द न झेलना पड़े।

आखिर क्यों नहीं रुक रहे हादसे?

बुधवार की दुर्घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा से जुड़े कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या मौजूदा निगरानी व्यवस्था पर्याप्त है? क्या भारी वाहनों की गति और आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण हो पा रहा है? क्या लगाए गए सुरक्षा उपकरणों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों की पहचान कर उनका स्थायी समाधान निकाला जा रहा है?

लगातार 18 हादसों के बाद अब केवल नए निर्देश और अस्थायी इंतजाम पर्याप्त नहीं दिखाई देते। जरूरत इस बात की है कि दुर्घटनाओं के कारणों का तकनीकी और व्यावहारिक स्तर पर आकलन किया जाए तथा सुरक्षा उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

मोहब्बेवाला-आशारोड़ी का यह हिस्सा अब केवल एक सड़क मार्ग नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा व्यवस्था के सामने खड़ी बड़ी चुनौती बन चुका है। बुधवार को चार लोगों की मौत ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह सिलसिला आगे भी कई परिवारों की खुशियां छीन सकता है। सवाल अब भी वही है कि आखिर कब इस सड़क पर सफर सुरक्षित हो पाएगा?