आईआईटी रुड़की की बड़ी उपलब्धि: शरीर की ऊर्जा से चलेगा 3D-MIDAS स्मार्ट बैंडेज, घाव भरने में करेगा मदद

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बैटरी, तार और बाहरी बिजली की जरूरत नहीं; INST मोहाली के सहयोग से विकसित तकनीक ‘नैनो एनर्जी’ जर्नल में प्रकाशित

रुड़की। चिकित्सा तकनीक के क्षेत्र में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की के शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के शोधकर्ताओं ने ऐसा स्मार्ट और स्व-संचालित इलेक्ट्रॉनिक बैंडेज विकसित किया है, जो शरीर की गतिविधियों से उत्पन्न ऊर्जा का उपयोग कर घाव भरने की प्रक्रिया में सहायता कर सकता है। इस नई तकनीक का नाम 3D-MIDAS रखा गया है।

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इस तकनीक की खासियत यह है कि इसे संचालित करने के लिए बैटरी, तार या किसी बाहरी ऊर्जा स्रोत की आवश्यकता नहीं होती। शरीर की सामान्य गतिविधियों से उत्पन्न यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत संकेतों में परिवर्तित कर बैंडेज घाव के उपचार में सहायक भूमिका निभा सकता है।

शरीर की गतिविधियों से पैदा होगी ऊर्जा

शोधकर्ताओं के अनुसार, मानव शरीर की रोजमर्रा की गतिविधियों के दौरान लगातार हलचल और यांत्रिक ऊर्जा उत्पन्न होती है। 3D-MIDAS इसी ऊर्जा को उपयोगी विद्युत संकेतों में बदलने की अवधारणा पर आधारित है।

इससे स्मार्ट बैंडेज को अलग से बैटरी या बिजली देने की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसी स्व-संचालित तकनीक भविष्य में उन परिस्थितियों में उपयोगी साबित हो सकती है, जहां पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक ड्रेसिंग के लिए बाहरी ऊर्जा स्रोत उपलब्ध कराना मुश्किल होता है।

आईआईटी रुड़की और INST मोहाली का सहयोग

3D-MIDAS को आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं ने इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST), मोहाली के सहयोग से विकसित किया है। शोध में स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक बैंडेज को घाव की उपचार प्रक्रिया में सहायता देने वाली स्व-संचालित प्रणाली के रूप में विकसित करने पर ध्यान दिया गया है।

चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाएं

स्मार्ट बैंडेज तकनीक तेजी से चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका हासिल कर रही है। ऐसे इलेक्ट्रॉनिक बैंडेज भविष्य में घाव की निगरानी, उपचार प्रक्रिया में सहायता और व्यक्तिगत चिकित्सा देखभाल को अधिक प्रभावी बनाने में उपयोगी हो सकते हैं।

3D-MIDAS की खासियत इसका ऊर्जा के लिए शरीर की गतिविधियों पर निर्भर होना है। इससे बैटरी बदलने या बाहरी तारों की आवश्यकता कम हो सकती है और पहनने योग्य चिकित्सा उपकरणों को अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकता है।

‘नैनो एनर्जी’ में प्रकाशित हुआ शोध

आईआईटी रुड़की और INST मोहाली की इस तकनीक से संबंधित शोध को पीयर-रिव्यूड वैज्ञानिक जर्नल ‘Nano Energy’ में प्रकाशित किया गया है। शोध के प्रकाशन के बाद इस तकनीक को स्व-संचालित चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हालांकि, 3D-MIDAS को व्यापक क्लिनिकल इस्तेमाल में लाने से पहले इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा का आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल यह तकनीक शरीर से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग कर घाव भरने में सहायता करने वाले स्मार्ट बैंडेज की दिशा में एक promising शोध उपलब्धि के रूप में सामने आई है।