हरदा के कार्यकाल में उत्तराखंड ने झेला सबसे बड़ा सियासी संकट, पहली बार लगा राष्ट्रपति शासन

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2016 में कांग्रेस के नौ विधायकों की बगावत से डगमगा गई थी हरीश रावत सरकार, राष्ट्रपति शासन से लेकर सुप्रीम कोर्ट के फ्लोर टेस्ट तक चला सियासी ड्रामा

उत्तराखंड। उत्तराखंड की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कार्यकाल कई राजनीतिक घटनाक्रमों के लिए याद किया जाता है। इनमें वर्ष 2016 का वह सियासी संकट सबसे अहम रहा, जब कांग्रेस के नौ विधायकों की बगावत के बाद प्रदेश की तत्कालीन हरीश रावत सरकार अल्पमत के संकट में घिर गई थी। हालात इतने बिगड़े कि उत्तराखंड में पहली बार राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा।

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कांग्रेस के नौ विधायकों की बगावत से शुरू हुआ संकट

साल 2016 में उत्तराखंड गठन के करीब 16 वर्ष बाद प्रदेश ने अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट का सामना किया। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के नौ विधायकों ने पार्टी से बगावत कर दी। बागी विधायकों के अलग होने के बाद सरकार के बहुमत को लेकर सवाल खड़े हो गए।

बागी विधायकों ने हरीश रावत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। इसी दौरान कथित विधायक खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) से जुड़ा एक स्टिंग वीडियो सामने आया, जिसने पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को और गरमा दिया। स्टिंग को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी हुई और मामला राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आ गया।

केंद्र ने लगाया राष्ट्रपति शासन

राज्य में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच केंद्र सरकार ने कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई। इसके बाद 27 मार्च 2016 को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। विधानसभा को निलंबित अवस्था में रखा गया और प्रदेश की सत्ता राष्ट्रपति के अधीन चली गई।

राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के फैसले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाया, जबकि केंद्र की ओर से सरकार के बहुमत और संवैधानिक स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, फ्लोर टेस्ट ने बदली तस्वीर

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। न्यायिक हस्तक्षेप के बाद हरीश रावत को विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर मिला। 10 मई 2016 को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट हुआ, जिसमें हरीश रावत सरकार ने बहुमत साबित किया।

इसके बाद उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन समाप्त हुआ और हरीश रावत दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर लौटे। यह पूरा घटनाक्रम देशभर में चर्चा का विषय बना और उत्तराखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक एवं राजनीतिक अध्याय के रूप में दर्ज हो गया।

आज भी याद किया जाता है 2016 का सियासी संकट

हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल का यह घटनाक्रम उत्तराखंड की राजनीति के सबसे बड़े सत्ता संकटों में गिना जाता है। कांग्रेस की बगावत, राष्ट्रपति शासन, स्टिंग ऑपरेशन और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुआ फ्लोर टेस्ट—इन सभी घटनाओं ने 2016 के राजनीतिक संकट को बेहद असाधारण बना दिया था।

यही वजह है कि जब भी उत्तराखंड की सियासत में हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल की चर्चा होती है, 2016 का यह सत्ता संकट और राष्ट्रपति शासन का दौर सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाओं में शामिल रहता है।