Udham Singh Nagar News: 13 साल बाद प्रोबेट की मांग को झटका, संपत्ति पर मालिकाना हक की याचिका खारिज

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रुद्रपुर। करीब 13 साल पुरानी अपंजीकृत वसीयत के आधार पर संपत्ति का मालिकाना हक मांगने वाली प्रोबेट याचिका को जिला एवं सत्र न्यायालय ने खारिज कर दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिकंद कुमार त्यागी की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण तथ्यों और सरकारी रिकॉर्ड को छिपाकर संपत्ति पर अधिकार हासिल नहीं किया जा सकता। अदालत ने याचिका को निर्धारित समय-सीमा से बाहर भी पाया।

आवास विकास कॉलोनी के प्लॉट से जुड़ा मामला

मामला आवास विकास कॉलोनी के प्लॉट संख्या बी-61 से संबंधित है। याचिकाकर्ता जसविंदर सिंह ने दावा किया था कि प्लॉट के मूल आवंटी राम निहोरा सिंह ने 17 अक्तूबर 2005 को उनके पक्ष में वसीयत की थी। राम निहोरा सिंह का 20 मई 2010 को निधन हो गया था।

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इसके बाद जसविंदर सिंह ने वर्ष 2023 में प्रोबेट याचिका दायर की। उनका कहना था कि उत्तराखंड आवास एवं विकास परिषद ने प्रोबेट नहीं होने के कारण संपत्ति के नामांतरण और बैनामे की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था।

13 साल की देरी का नहीं मिला संतोषजनक कारण

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि वसीयतकर्ता की मृत्यु के करीब 13 साल बाद प्रोबेट याचिका दायर की गई। इस लंबी देरी के पीछे कोई संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं किया गया।

अदालत के सामने ऐसे सरकारी दस्तावेज भी पेश नहीं किए गए, जिनसे यह स्पष्ट हो सके कि आवास एवं विकास परिषद ने नामांतरण की प्रक्रिया कब और किस आधार पर रोकी थी।

इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने प्रोबेट और संपत्ति पर मालिकाना अधिकार से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया।