अल्मोड़ा चेक बाउंस केस में बड़ा फैसला: एमबीएल इंफ्रास्ट्रक्टर्स के एमडी अंजनी कुमार लखौटिया को छह माह की सजा

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रानीखेत (अल्मोड़ा)। चेक बाउंस मामले में रानीखेत न्यायालय ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कंपनी और उसके प्रबंध निदेशक को दोषी करार दिया है। वर्ष 2017 से लंबित इस प्रकरण में सिविल जज (न्यायिक मजिस्ट्रेट) जसमीत कौर की अदालत ने परिवादी फर्म आरपीजी इंफ्राटेक द्वारा दायर वाद पर सुनवाई करते हुए एमबीएल इंफ्रास्ट्रक्टर्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं सीएमडी अंजनी कुमार लखौटिया को दोषी ठहराया।

1.35 करोड़ रुपये का चेक हुआ बाउंस, धारा 138 के तहत अपराध सिद्ध

न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर यह पाया गया कि कंपनी की ओर से जारी लगभग 1 करोड़ 35 लाख रुपये का चेक बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण अनादृत (चेक बाउंस) हो गया। इसके बाद विधिक नोटिस भेजे जाने के बावजूद निर्धारित समयसीमा के भीतर भुगतान नहीं किया गया।

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अदालत ने इसे परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत दंडनीय अपराध मानते हुए आरोप सिद्ध किया।

छह माह का कारावास और 2.45 करोड़ रुपये प्रतिकर का आदेश

न्यायालय ने एमबीएल इंफ्रास्ट्रक्टर्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अंजनी कुमार लखौटिया को छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई। साथ ही लगभग 2.45 करोड़ रुपये की राशि परिवादी को प्रतिकर (कंपनसेशन) के रूप में अदा करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त एक निर्धारित अतिरिक्त धनराशि राज्य को जमा कराने का भी आदेश दिया गया है।

अन्य निदेशक दोषमुक्त, एक के विरुद्ध कार्रवाई समाप्त

मामले में नामजद अन्य निदेशकों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया। वहीं एक निदेशक के निधन के कारण उसके विरुद्ध पूर्व में ही न्यायालयीन कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी।

उच्च न्यायालय में अपील का अधिकार सुरक्षित

न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि निर्णय से असंतुष्ट पक्षों को उच्च न्यायालय में अपील करने का वैधानिक अधिकार सुरक्षित रहेगा।

यह फैसला चेक बाउंस मामलों में न्यायालय की सख्त रुख को दर्शाता है और वित्तीय लेन-देन में कानूनी जवाबदेही को मजबूत करता है।