कांग्रेस की परिवर्तन शंखनाद यात्रा में हरदा का भाजपा पर तीखा हमला, पलायन, खेती और बेरोजगारी पर उठाए सवाल

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द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड में राजनीतिक सरगर्मियों के बीच कांग्रेस की परिवर्तन शंखनाद यात्रा के तहत द्वाराहाट पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन, खेती-किसानी की बदहाली, जंगली जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान, बेरोजगारी, पेंशन और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को उठाते हुए राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। हरीश रावत ने कार्यकर्ताओं से आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए अगले तीन से चार महीनों तक लगातार मेहनत करने और परिवर्तन की आवाज को गांव-गांव तक पहुंचाने का आह्वान किया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन के कारण गांवों की स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। खेती-किसानी प्रभावित हो रही है और जंगली जानवर किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के पास खेती को बचाने और किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए न तो स्पष्ट सोच है और न ही प्रभावी नीति।

पलायन और खेती की बदहाली पर सरकार को घेरा

हरीश रावत ने कहा कि पहाड़ों से लोगों के पलायन का सीधा असर कृषि गतिविधियों पर पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में खेतों की देखभाल करने वाले लोगों की कमी है, वहीं जंगली जानवरों के कारण किसानों को अपनी मेहनत का उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश में भाजपा कार्यकर्ताओं की संख्या से अधिक गुलदार और बंदर घूमते नजर आ रहे हैं। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष और खेती को हो रहे नुकसान की समस्या को राजनीतिक मुद्दा बनाया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि पहाड़ों में खेती को बचाना है तो किसानों को सुरक्षा, सहायता और प्रोत्साहन देने वाली ठोस व्यवस्था बनानी होगी। उनके मुताबिक, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किए बिना पलायन की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

पेंशन योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा पर उठाए सवाल

हरीश रावत ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जिन लोगों को पेंशन का लाभ दिया गया था, भाजपा सरकार ने उन योजनाओं को बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने पारंपरिक लोक कलाकारों और जागर जैसे सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़े लोगों को भी पेंशन देने की पहल की थी।

उन्होंने दावा किया कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों, बुजुर्गों और पारंपरिक सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े लोगों को आर्थिक सहारा देना था। हरीश रावत ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार इन वर्गों की जरूरतों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दे रही है।

हालांकि, पेंशन योजनाओं को बंद किए जाने संबंधी उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है।

बेरोजगारी और अतिथि शिक्षकों का मुद्दा उठाया

पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश में रोजगार और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अतिथि शिक्षकों को हटाया जा रहा है, जबकि युवाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में पर्याप्त काम नहीं हो रहा है।

हरीश रावत ने दावा किया कि राजनीतिक पहुंच रखने वाले कुछ लोगों को अस्थायी नौकरियों में अवसर मिल रहे हैं, जबकि अन्य युवाओं को रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने वाला विषय बताया।

उनकी टिप्पणी का मुख्य केंद्र रोजगार के अवसरों में कथित असमानता और युवाओं के भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता रही। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोजगार, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम किए जाने की जरूरत है।

महिला सुरक्षा और अंकिता भंडारी प्रकरण का किया उल्लेख

हरीश रावत ने महिला सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने प्रदेश में दुष्कर्म और हत्याओं की घटनाओं का उल्लेख किया तथा आरोप लगाया कि ऐसे मामलों में राजनीतिक संरक्षण को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

उन्होंने अंकिता भंडारी प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि यह उत्तराखंड की अस्मिता और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला है। उनके अनुसार, इस प्रकरण ने प्रदेश में महिला सुरक्षा और न्याय को लेकर गंभीर बहस को जन्म दिया है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी भी सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है।

चुनाव आयोग को लेकर भी लगाए आरोप

अपने संबोधन में हरीश रावत ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के मामले में पक्षपात किया जा रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए इस संबंध में अपनी आपत्ति व्यक्त की।

हालांकि, मतदाता सूची में अनियमितताओं और किसी पक्ष को अनुचित लाभ पहुंचाए जाने के उनके आरोपों की पुष्टि के लिए आधिकारिक दस्तावेजों या संबंधित प्राधिकरण के बयान की आवश्यकता होगी।

हरीश रावत ने कार्यकर्ताओं से लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े मुद्दों को जनता के सामने उठाने और परिवर्तन की आवाज को अधिक मजबूती से आगे बढ़ाने की अपील की।

मदन बिष्ट की तारीफ, कांग्रेस कार्यकर्ताओं से एकजुट होने का आह्वान

द्वाराहाट में अपने संबोधन के दौरान हरीश रावत ने स्थानीय विधायक मदन बिष्ट की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कांग्रेस और गांधी परिवार से मिले अवसरों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने इन अवसरों का उपयोग उत्तराखंड के विकास के लिए करने का प्रयास किया।

उन्होंने स्वीकार किया कि अब वह पहले की तरह गांव-गांव जाकर लोगों से सीधे संपर्क नहीं कर सकते, लेकिन कार्यकर्ताओं को संगठित करने और उन्हें सक्रिय रखने के लिए अपना योगदान देते रहेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से आपसी समन्वय बनाए रखने और जनता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक बदलाव के लिए संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं की निरंतर मेहनत आवश्यक है।

गैरसैंण के विकास का मुद्दा भी उठाया

हरीश रावत ने गैरसैंण और उसके आसपास के क्षेत्रों के विकास का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनकी सरकार के दौरान वहां विभिन्न सुविधाएं विकसित करने की दिशा में काम किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद गैरसैंण और आसपास के क्षेत्रों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया।

उनके मुताबिक, गैरसैंण उत्तराखंड की राजनीतिक और क्षेत्रीय आकांक्षाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास, स्थानीय लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराने और क्षेत्रीय असमानता दूर करने के लिए यहां निरंतर प्रयास जरूरी हैं।

उन्होंने गैरसैंण के विकास को लेकर नए सिरे से संघर्ष करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की जरूरतों को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में लाना होगा।

द्वाराहाट से पूरे प्रदेश में बदलाव का संदेश देने की तैयारी

अपने संबोधन के अंत में हरीश रावत ने परिवर्तन शंखनाद यात्रा को प्रदेशव्यापी जनसंपर्क अभियान के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अगले तीन से चार महीनों तक लगातार मेहनत करने की अपील की, ताकि पार्टी की आवाज प्रदेश के गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच सके।

उन्होंने कहा कि द्वाराहाट को परिवर्तन शंखनाद का केंद्र बनाकर इस संदेश को पूरे उत्तराखंड में पहुंचाया जाना चाहिए। उनके संबोधन में खेती-किसानी, पलायन, रोजगार, महिला सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और गैरसैंण के विकास जैसे मुद्दे प्रमुखता से शामिल रहे।

कुल मिलाकर, परिवर्तन शंखनाद यात्रा के दौरान हरीश रावत ने भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया। वहीं, उनके आरोपों और दावों पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद इन मुद्दों पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।