नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वर्षों से सरकारी विभागों में कार्यरत उपनल संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, समान वेतन और वेतन से जीएसटी कटौती के मामले में राज्य सरकार से कड़ा स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत में 1 जुलाई 2026 का शासनादेश प्रस्तुत किया। इसमें बताया गया कि कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए कट-ऑफ तिथि 2018 से बढ़ाकर 15 अक्टूबर 2024 कर दी गई है। इस दायरे में आने वाले कर्मचारियों को ‘समान कार्य, समान वेतन’ का लाभ 1 मार्च 2026 से दिया जाएगा।
सरकार ने 3 फरवरी 2026 का एक अन्य आदेश भी कोर्ट के समक्ष रखा, जिसमें कहा गया कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति संविदा आधार पर ही रहेगी और वे नियमित कर्मचारियों की तरह अन्य सेवा लाभों का दावा नहीं कर सकेंगे।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इन आदेशों पर संतोष व्यक्त नहीं किया और सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि पूर्व में दिए गए न्यायालय के आदेशों का पूर्ण पालन क्यों नहीं किया गया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ता उपनल कर्मचारी संघ का कहना है कि नवंबर 2025 में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को उपनल कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन, वेतन से GST कटौती बंद करने और नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक इन आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया है।
अब हाईकोर्ट सरकार के स्पष्टीकरण के बाद मामले में आगे की सुनवाई करेगा।




