1952 में गरुड़ पहुंचे थे पं. गोविंद बल्लभ पंत, फावड़े से लिखी थी विकास की इबारत; आज भी याद दिलाते हैं उनके कार्य

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गरुड़। उत्तराखंड के विकास और जनसेवा के इतिहास में भारत रत्न पं. गोविंद बल्लभ पंत का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। वर्ष 1952 में पं. गोविंद बल्लभ पंत गरुड़ पहुंचे थे। उस समय वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। अपने दौरे के दौरान उन्होंने क्षेत्र में कई विकास कार्यों की शुरुआत स्वयं फावड़ा चलाकर की थी। उनके इस प्रयास की यादें आज भी गरुड़ क्षेत्र में सहेजी गई हैं।

पं. पंत के इस दौरे को क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में याद किया जाता है। उस दौर में पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों को आगे बढ़ाना बड़ी चुनौती थी। ऐसे समय में पं. पंत का स्वयं मौके पर पहुंचकर विकास कार्यों की शुरुआत करना लोगों के बीच खासा प्रभाव छोड़ गया।

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फावड़ा चलाकर विकास कार्यों की शुरुआत

वर्ष 1952 में गरुड़ पहुंचे पं. गोविंद बल्लभ पंत ने कई स्थानों पर फावड़ा चलाकर विकास कार्यों का शुभारंभ किया था। उनके द्वारा शुरू किए गए कार्यों में भेटा नहर और दर्शानी स्कूल प्रमुख रूप से शामिल बताए जाते हैं।

नहर निर्माण जैसे कार्य उस समय ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण थे। सिंचाई की सुविधा बेहतर होने से खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद थी। वहीं, स्कूल की शुरुआत शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी गई।

आज भी धरोहर के रूप में सहेजे गए हैं कार्य

पं. गोविंद बल्लभ पंत के गरुड़ दौरे और उनके द्वारा शुरू किए गए विकास कार्यों की स्मृतियां आज भी क्षेत्र में मौजूद हैं। उनके कार्य उस दौर की विकास सोच और पहाड़ के लोगों के प्रति उनकी प्राथमिकताओं की याद दिलाते हैं।

स्थानीय स्तर पर पं. पंत के योगदान को आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है। उनके द्वारा शुरू किए गए कार्यों से जुड़ी यादें नई पीढ़ी को क्षेत्र के विकास के इतिहास से परिचित कराती हैं।

उत्तराखंड के विकास से जुड़ा रहा पंत का नाम

पं. गोविंद बल्लभ पंत स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में रहे और स्वतंत्रता के बाद प्रशासनिक जिम्मेदारियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में पर्वतीय क्षेत्रों के विकास से जुड़े मुद्दों को भी महत्व मिला।

गरुड़ में वर्ष 1952 का उनका दौरा इसी ऐतिहासिक दौर की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जाता है। फावड़ा चलाकर विकास कार्यों की शुरुआत करने की उनकी तस्वीर और उससे जुड़ी स्मृतियां आज भी क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणा का विषय हैं।

गरुड़ का यह इतिहास केवल एक राजनीतिक दौरे की कहानी नहीं, बल्कि उस दौर में पहाड़ों में विकास की नींव रखने के प्रयासों की याद भी है।