बागेश्वर के कर्मी में खड़िया खनन के खिलाफ आक्रोश, 1983 की त्रासदी की यादें ताजा

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ग्रामीणों ने कलक्ट्रेट में किया प्रदर्शन, प्रस्तावित खनन की स्वीकृति रद्द करने की मांग; बोले-आपदा के जख्म अभी भी नहीं भूले

बागेश्वर। 1983 की भीषण आपदा में 37 लोगों और कई मवेशियों की जान गंवा चुके कर्मी क्षेत्र में प्रस्तावित खड़िया खनन को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को ग्रामीणों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और प्रस्तावित खनन की स्वीकृति रद्द करने की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता और पूर्व में हुई भीषण आपदा को देखते हुए खनन की अनुमति देना गंभीर चिंता का विषय है।

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1983 की आपदा की यादें ताजा

कर्मी क्षेत्र के ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 1983 में हुई भीषण आपदा में 37 लोगों और कई मवेशियों की जान चली गई थी। इस त्रासदी की यादें आज भी ग्रामीणों के मन में हैं। ऐसे में क्षेत्र में प्रस्तावित खड़िया खनन को लेकर लोगों में भय और चिंता बनी हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि खनन से क्षेत्र में भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। इसी आशंका के चलते वे खनन की स्वीकृति रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

कलक्ट्रेट में प्रदर्शन, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

मंगलवार को ग्रामीणों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर अपनी मांग प्रशासन के सामने रखी। उन्होंने प्रस्तावित खनन को लेकर विरोध जताते हुए कहा कि क्षेत्र की सुरक्षा और ग्रामीणों के हितों को ध्यान में रखते हुए खनन की स्वीकृति नहीं दी जानी चाहिए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि खनन की स्वीकृति मिली, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से मामले में गंभीरता से विचार करने और ग्रामीणों की चिंताओं का समाधान करने की मांग की।

खनन को लेकर बढ़ी चिंता

कर्मी क्षेत्र में प्रस्तावित खड़िया खनन को लेकर ग्रामीणों का विरोध अब खुलकर सामने आ गया है। 1983 की आपदा और भूस्खलन के खतरे का हवाला देते हुए ग्रामीण खनन की अनुमति के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए किसी भी निर्णय से पहले ग्रामीणों की सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।