अल्मोड़ा। पहाड़ों से प्यार, साहस और लगातार मेहनत के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती। उत्तराखंड के अल्मोड़ा के नन्हे ट्रेकर रियांश पंत इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आए हैं। महज चार साल की उम्र में रियांश ने चार हिमालयी ट्रेक पूरे कर अपनी अलग पहचान बनाई है। अब उनका अगला बड़ा लक्ष्य वर्ष 2027 में एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचना और यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस पर आरोहण करना है।
कम उम्र में रियांश का पहाड़ों के प्रति जुनून और उनकी शारीरिक तैयारी लोगों को हैरान करती है। पर्वतारोहण से जुड़े परिवारिक वातावरण में पले-बढ़े रियांश लगातार अपने लक्ष्य की ओर मेहनत कर रहे हैं।
पिता से मिली पर्वतों के प्रति प्रेरणा
रियांश के पिता राकेश पंत पर्वतारोहण से जुड़े हुए हैं, जिसके कारण बचपन से ही रियांश का पहाड़ों और ट्रेकिंग के प्रति विशेष लगाव रहा है। पिता से मिले पर्वत प्रेम को रियांश अब अपने साहस, अनुशासन और नियमित अभ्यास के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं।
उत्तराखंड को देवभूमि के साथ-साथ हिमालयी संस्कृति और साहसिक गतिविधियों के लिए भी जाना जाता है। यहां की पर्वतीय जीवनशैली बच्चों को प्रकृति और पहाड़ों के बेहद करीब ले जाती है। रियांश का सफर भी इसी पर्वतीय जुनून का एक उदाहरण है।
चार साल की उम्र में चार हिमालयी ट्रेक पूरे करना उनकी रुचि और लगन को दर्शाता है। इतनी कम उम्र में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच ट्रेकिंग के प्रति उनका उत्साह उन्हें खास बनाता है।
चार साल की उम्र में पूरे किए 4 हिमालयी ट्रेक
रियांश पंत ने बेहद कम उम्र में हिमालयी क्षेत्रों में चार ट्रेक पूरे किए हैं। हिमालयी ट्रेक सामान्य ट्रेकिंग की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि यहां मौसम तेजी से बदल सकता है और ऊंचाई के साथ शारीरिक चुनौतियां भी बढ़ती हैं।
रियांश की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह कम उम्र से ही प्रकृति, पर्वतों और आउटडोर गतिविधियों से जुड़ रहे हैं। नियमित ट्रेकिंग से उन्हें पर्वतीय परिस्थितियों को समझने और अपनी शारीरिक क्षमता विकसित करने का अवसर मिल रहा है।
हालांकि, बच्चों के लिए किसी भी ऊंचाई वाले ट्रेक की योजना हमेशा प्रशिक्षित विशेषज्ञों, अभिभावकों और आवश्यक सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए।
2027 में एवरेस्ट बेस कैंप का लक्ष्य
रियांश अब अपने अगले बड़े लक्ष्य की तैयारी कर रहे हैं। वर्ष 2027 में उनका लक्ष्य एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचना है। एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक दुनिया के सबसे चर्चित और लोकप्रिय हाई-एल्टीट्यूड ट्रेकिंग अभियानों में से एक माना जाता है।
हिमालय की विशाल चोटियों के बीच स्थित एवरेस्ट क्षेत्र हर साल दुनियाभर के ट्रेकर्स और पर्वतारोहियों को आकर्षित करता है। रियांश के लिए एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचना उनके ट्रेकिंग सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव हो सकता है।
इतनी कम उम्र में एक बड़े लक्ष्य के लिए तैयारी करना अनुशासन और लगातार अभ्यास की मांग करता है। रियांश का परिवार उनकी रुचि को सही मार्गदर्शन और तैयारी के साथ आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहा है।
माउंट एलब्रुस पर भी है नजर
एवरेस्ट बेस कैंप के अलावा रियांश का लक्ष्य यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस पर आरोहण करना भी है। एलब्रुस की ऊंचाई 5,642 मीटर बताई जाती है और यह पर्वतारोहियों के लिए एक प्रसिद्ध चुनौतीपूर्ण पर्वत है।
एलब्रुस पर चढ़ाई के लिए शारीरिक फिटनेस, ऊंचाई के अनुकूलन, मौसम की जानकारी और उचित पर्वतारोहण प्रशिक्षण बेहद महत्वपूर्ण होता है। रियांश वर्ष 2027 में इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में भी तैयारी कर रहे हैं।
उनका यह सपना केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के युवा और बच्चों के लिए भी प्रेरणा का विषय बन सकता है।
रोज 10 किलोमीटर दौड़कर करते हैं तैयारी
रियांश की फिटनेस तैयारी भी उनकी कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जानकारी के अनुसार, वह प्रतिदिन करीब 10 किलोमीटर दौड़ते हैं, जिसे पूरा करने में उन्हें लगभग एक घंटा 17 मिनट लगता है।
नियमित दौड़ से उनकी सहनशक्ति और शारीरिक क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। पर्वतीय ट्रेकिंग और लंबी दूरी की गतिविधियों में शारीरिक फिटनेस महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कम उम्र में नियमित खेल और फिटनेस गतिविधियों के प्रति रुचि बच्चों में अनुशासन और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा दे सकती है। हालांकि, बच्चों की शारीरिक गतिविधियां हमेशा उनकी उम्र, स्वास्थ्य और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार होनी चाहिए।
उत्तराखंड की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
रियांश पंत की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सही मार्गदर्शन, अनुशासन और जुनून के साथ कम उम्र से ही बच्चे अपनी रुचियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में पर्वतारोहण और ट्रेकिंग केवल साहसिक गतिविधियां नहीं हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली से भी गहराई से जुड़ी हुई हैं।
अल्मोड़ा के इस नन्हे ट्रेकर ने चार साल की उम्र में चार हिमालयी ट्रेक पूरे कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। अब उनकी नजर 2027 के दो बड़े लक्ष्यों—एवरेस्ट बेस कैंप और माउंट एलब्रुस—पर है।
उनका सफर अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन पर्वतों के प्रति उनका जुनून, नियमित तैयारी और बड़े सपने उन्हें एक अलग पहचान दिला रहे हैं।
निष्कर्ष
अल्मोड़ा के रियांश पंत की कहानी साहस, अनुशासन और जुनून की प्रेरणादायक मिसाल है। महज चार साल की उम्र में चार हिमालयी ट्रेक पूरे करने के बाद अब वह वर्ष 2027 में एवरेस्ट बेस कैंप और यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस को अपने लक्ष्य के रूप में देख रहे हैं।
रोज करीब 10 किलोमीटर दौड़कर अपनी फिटनेस पर काम करने वाले रियांश का यह सफर आने वाले वर्षों में और भी दिलचस्प हो सकता है। उत्तराखंड के इस नन्हे ट्रेकर की उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे राज्य के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।




