प्रोफेसर सौरभ विजय बोले- आपदाओं के जोखिम का आकलन कर नुकसान कम किया जा सकता है
रुड़की। हिमालय में ग्लेशियल झीलों के बढ़ते क्षेत्रफल और उनसे उत्पन्न होने वाले आपदा के खतरे को लेकर आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर सौरभ विजय ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण हिमालय क्षेत्र में आपदाएं आती रहेंगी, लेकिन उनके जोखिम को कम किया जा सकता है। इसके लिए आपदाओं के संभावित प्रभावों का वैज्ञानिक मॉडलिंग के माध्यम से आकलन करना जरूरी है।
नेपाल की बाढ़ के कारणों पर अलग-अलग राय
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ की वजह को लेकर विज्ञानियों की राय अलग-अलग हो सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि हिमालय क्षेत्र में आपदाओं का खतरा बना रहेगा। ऐसे में आपदा के संभावित कारणों और प्रभावों को समझने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन महत्वपूर्ण हैं।
ग्लेशियल झीलों पर नजर रखना जरूरी
प्रोफेसर सौरभ विजय ने हिमालय में ग्लेशियल झीलों के बढ़ते क्षेत्रफल को आपदा के बढ़ते जोखिम से जोड़ते हुए इस दिशा में गंभीरता से अध्ययन की आवश्यकता बताई। उनका कहना है कि यदि आपदाओं के जोखिम का वैज्ञानिक मॉडल तैयार किया जा सके, तो संभावित नुकसान को कम करने के लिए बेहतर तैयारी की जा सकती है।




