डंकी रूट से अवैध विदेश यात्रा कराने वाले अभियुक्त को चंपावत कोर्ट ने सुनाई 5 साल की सजा, 32 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया

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उत्तराखंड के चंपावत जिले में डंकी रूट के जरिए अवैध रूप से विदेश भेजने के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने लोगों को गैरकानूनी तरीके से विदेश भेजने के मामले में दोषी पाए गए गुजरात निवासी अभियुक्त को पांच साल के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर 32 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर अभियुक्त को एक माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

यह मामला बनबसा क्षेत्र के एक युवक के विदेश जाने के बाद रहस्यमय तरीके से लापता होने से जुड़ा है। परिवार ने अपने बेटे को विदेश भेजने के नाम पर अवैध तरीके अपनाए जाने और उसके लापता होने के संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने अभियुक्त को दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई।

दिल्ली से बैंकॉक पहुंचने के बाद लापता हुआ था युवक

मामले के अनुसार, बनबसा के गुदमी भैंसाझाला निवासी गजेंद्र सिंह सौन ने 5 जून 2024 को पुलिस को तहरीर देकर शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि उनका बेटा ललित सिंह सौन दिल्ली से बैंकॉक गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उसका कोई पता नहीं चल पाया। बेटे से संपर्क नहीं होने और उसकी जानकारी न मिलने के कारण परिवार की चिंता लगातार बढ़ती गई।

परिजनों ने अपने स्तर से भी ललित के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि ललित सिंह सौन म्यांमार में मौजूद है। बताया गया कि वह म्यांमार के उस क्षेत्र में था, जहां चीन की ओर से लीज पर लिए गए किसी द्वीप में उसके होने की जानकारी सामने आई थी। इस सूचना के बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई।

डंकी रूट के जरिए विदेश भेजने का मामला आया सामने

शिकायत में अवैध तरीके से विदेश भेजे जाने का मामला सामने आने के बाद प्रकरण की जांच शुरू हुई। डंकी रूट के जरिए विदेश पहुंचाने के नाम पर लोगों को गैरकानूनी रास्तों से अलग-अलग देशों तक ले जाने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। इस तरह की यात्रा में लोगों को कई देशों की सीमाएं अवैध रूप से पार कराई जाती हैं, जिससे उनकी सुरक्षा और जीवन पर गंभीर खतरा बना रहता है।

ललित सिंह सौन के मामले में भी विदेश जाने के बाद उनके लापता होने की सूचना ने परिवार को मुश्किल में डाल दिया था। मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद गुजरात निवासी अभियुक्त के खिलाफ मुकदमा चला।

अदालत ने सुनाई पांच साल की सजा

मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद चंपावत जिला एवं सत्र न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए पांच साल के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने 32 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में अभियुक्त को एक माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

अदालत के इस फैसले को अवैध तरीके से विदेश भेजने के मामलों में महत्वपूर्ण न्यायिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे मामलों में विदेश जाने की चाह रखने वाले लोगों को आकर्षक अवसरों और आसान रास्तों का लालच देकर जोखिम भरी परिस्थितियों में धकेला जा सकता है।

विदेश जाने के नाम पर धोखाधड़ी से सतर्क रहने की जरूरत

डंकी रूट के जरिए विदेश जाने की कोशिश न केवल गैरकानूनी है, बल्कि इसमें जान-माल की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर खतरे रहते हैं। कई बार विदेश में नौकरी या बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर लोगों को ऐसे रास्तों पर भेज दिया जाता है, जहां उनका परिवार से संपर्क टूट जाता है और उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं रहती।

चंपावत का यह मामला भी इसी तरह की गंभीर परिस्थितियों को सामने लाता है। अदालत द्वारा अभियुक्त को पांच साल की सजा सुनाए जाने के बाद अवैध विदेश यात्रा कराने वाले नेटवर्क के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का संदेश गया है। वहीं, ललित सिंह सौन के विदेश में लापता होने से जुड़े घटनाक्रम ने परिवारों को विदेश यात्रा के लिए केवल वैध और अधिकृत माध्यमों का इस्तेमाल करने की आवश्यकता भी याद दिलाई है।