अडानी पावर ने हरिद्वार की बीएचईएल को दिए चार बड़े पावर प्रोजेक्ट के ऑर्डर, 6400 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं

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हरिद्वार। देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में हरिद्वार स्थित भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। अडानी पावर लिमिटेड ने देश में चार नई ताप विद्युत परियोजनाओं की स्थापना के लिए बीएचईएल को बड़े घरेलू अनुबंध दिए हैं। इन परियोजनाओं की कुल प्रस्तावित उत्पादन क्षमता 6,400 मेगावाट है। चारों परियोजनाओं के लिए मिले इन ऑर्डर से बीएचईएल के ताप विद्युत कारोबार और ऑर्डर बुक को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

प्रत्येक परियोजना की क्षमता 1,600 मेगावाट

बीएचईएल की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, अडानी पावर ने चार परियोजनाओं के लिए अनुबंध दिए हैं। इनमें से प्रत्येक परियोजना में 800-800 मेगावाट की दो इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इस तरह हर परियोजना की कुल क्षमता 1,600 मेगावाट होगी। चारों परियोजनाओं को मिलाकर कुल आठ इकाइयां स्थापित की जानी हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 6,400 मेगावाट होगी।

बॉयलर, टर्बाइन और जनरेटर की आपूर्ति करेगा बीएचईएल

अनुबंध के तहत बीएचईएल चारों परियोजनाओं के लिए बॉयलर, टर्बाइन और जनरेटर सहित महत्वपूर्ण उपकरणों की आपूर्ति करेगा। इसके साथ ही संबंधित सहायक उपकरण और निर्धारित तकनीकी सेवाएं भी उपलब्ध कराएगा। परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समय-सीमा अडानी पावर की जरूरतों और परियोजना संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार तय होगी।

20 हजार से 28 हजार करोड़ रुपये तक हो सकती है ऑर्डर की कीमत

बीएचईएल की नियामकीय जानकारी के मुताबिक, चारों अनुबंधों में प्रत्येक परियोजना का मूल्य 5,000 करोड़ से 7,000 करोड़ रुपये के बीच है। इस आधार पर चारों परियोजनाओं के कुल अनुबंधों का अनुमानित मूल्य 20,000 करोड़ से 28,000 करोड़ रुपये तक हो सकता है। यह राशि जीएसटी से अलग है।

ऊर्जा क्षेत्र में बीएचईएल की मजबूत भूमिका

बीएचईएल देश की प्रमुख इंजीनियरिंग और विनिर्माण कंपनियों में शामिल है। कंपनी के अनुसार, उसके द्वारा निर्मित 214 गीगावाट से अधिक क्षमता के बिजली उत्पादन उपकरण दुनिया भर में स्थापित किए जा चुके हैं। अडानी पावर से मिले नए अनुबंध कंपनी की ताप विद्युत उपकरण निर्माण और परियोजना निष्पादन क्षमता के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

इन परियोजनाओं के माध्यम से देश की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में स्वदेशी उपकरणों और तकनीकी विशेषज्ञता की भूमिका भी मजबूत होगी।