हरिद्वार। उत्तराखंड में साइबर अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। डिजिटल तकनीक और ऑनलाइन सुविधाओं के विस्तार के साथ साइबर ठगों ने भी ठगी के नए-नए तरीके अपना लिए हैं। पिछले पांच वर्षों के दौरान प्रदेश में साइबर अपराधियों ने लोगों को 468 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगाई है। चिंताजनक बात यह है कि इस अवधि में साइबर ठगी से संबंधित शिकायतों की संख्या में करीब सात गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़े बताते हैं कि साइबर अपराध अब प्रदेश के सामने एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
साइबर ठगी अब केवल मोबाइल पर आने वाली फर्जी कॉल या बैंक खाते से रकम उड़ाने तक सीमित नहीं रह गई है। ठग ऑनलाइन निवेश, फर्जी बैंकिंग लेनदेन, सोशल मीडिया के माध्यम से धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन तरीकों से लोगों को मानसिक दबाव में लेकर उनकी जीवनभर की जमा-पूंजी तक हड़प ली जा रही है।
डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी
साइबर अपराधियों ने ठगी के तरीकों को पहले से अधिक योजनाबद्ध और तकनीकी बना लिया है। डिजिटल अरेस्ट के मामलों में ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स विभाग या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते हैं। इसके बाद किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल होने का डर दिखाकर उन्हें वीडियो कॉल पर निगरानी में रखते हैं और गिरफ्तारी का भय दिखाकर बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।
वहीं, ऑनलाइन निवेश के नाम पर भी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर आकर्षक रिटर्न का लालच देकर फर्जी निवेश योजनाओं में पैसा लगवाया जाता है। शुरुआत में कुछ रकम का मुनाफा दिखाकर लोगों का भरोसा जीता जाता है और फिर बड़ी रकम जमा कराने के बाद ठग संपर्क तोड़ देते हैं।
बढ़ती शिकायतें बनीं चिंता का विषय
पिछले पांच वर्षों में साइबर ठगी से जुड़ी शिकायतों में सात गुना वृद्धि होना इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। ठगी की घटनाओं में केवल तकनीकी जानकारी की कमी वाले लोग ही नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे और डिजिटल लेनदेन की समझ रखने वाले लोग भी निशाना बन रहे हैं। कई मामलों में ठग लोगों की व्यक्तिगत जानकारी, बैंकिंग विवरण और ओटीपी हासिल कर खातों से रकम निकाल लेते हैं।
सावधानी ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे बड़ा उपाय
साइबर अपराध से बचने के लिए लोगों को अनजान नंबरों से आने वाली कॉल, संदिग्ध लिंक और फर्जी निवेश प्रस्तावों से सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंकिंग पासवर्ड, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा, किसी भी सरकारी अधिकारी या जांच एजेंसी के नाम पर फोन करके पैसे मांगने वालों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है तो उसे बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके साथ ही आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत की जा सकती है।
प्रदेश में पांच वर्षों के दौरान 468 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी और शिकायतों में सात गुना वृद्धि ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के साथ-साथ आम लोगों को जागरूक करना भी बेहद जरूरी हो गया है।





