देहरादून/चंपावत। उत्तराखंड के चंपावत जिले की बहादुर बेटी माया कांडपाल को उनके अदम्य साहस और सूझबूझ के लिए ‘मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। पांच अगस्त 2025 को भारी बारिश के बीच उफनती नदी में फंसी अपनी दो सहेलियों की जान बचाकर माया ने साहस और मानवता की मिसाल पेश की थी। उनके इसी वीरतापूर्ण कार्य को देखते हुए राज्य सरकार ने उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया है। आगामी 6 नवंबर को देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उन्हें यह पुरस्कार प्रदान करेंगे।
जान जोखिम में डालकर बचाई दो सहेलियों की जान
घटना पांच अगस्त 2025 की है। उस दिन चंपावत क्षेत्र में भारी बारिश के चलते जनजीवन प्रभावित था। जगह-जगह भूस्खलन हो रहा था, पहाड़ियों से लगातार पत्थर गिर रहे थे और कई सड़क मार्ग बाधित हो गए थे। खराब मौसम और रास्तों की दुश्वारियों के बावजूद विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचना था, क्योंकि विद्यालय में गृह परीक्षाएं चल रही थीं।
इसी दौरान रास्ते में उफनती नदी के कारण स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई। नदी का तेज बहाव जानलेवा साबित हो सकता था। ऐसे मुश्किल हालात में माया कांडपाल ने अपनी दो सहेलियों को संकट में देखकर साहस का परिचय दिया और उनकी जान बचाने के लिए आगे आईं।
माया ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना जिस तरह इस मुश्किल परिस्थिति का सामना किया, वह उनकी हिम्मत, सूझबूझ और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री करेंगे सम्मानित
माया के इस साहसिक कार्य को राज्य स्तर पर सराहना मिली है। उन्हें ‘मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार’ के लिए चुना गया है। छह नवंबर को देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उन्हें सम्मानित करेंगे।
अन्य बच्चों के लिए बनीं प्रेरणा
माया कांडपाल की बहादुरी की कहानी प्रदेश के अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणादायक है। उन्होंने साबित किया कि साहस केवल उम्र का मोहताज नहीं होता, बल्कि कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने और दूसरों की सहायता के लिए आगे आने का जज्बा ही वास्तविक वीरता है।
चंपावत की इस बेटी की उपलब्धि ने जिले को गौरवान्वित किया है। उनका सम्मान न केवल उनके साहसिक कार्य की पहचान है, बल्कि बच्चों में निडरता, मानवीय संवेदना और संकट के समय दूसरों की मदद करने की भावना को भी प्रोत्साहित करेगा।





