उत्तराखंड की लोकभाषाओं, संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को हिंदी के साथ-साथ उत्तराखंड की दो प्रमुख लोकभाषाओं गढ़वाली और कुमाऊंनी में भी सुना जा सकेगा। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो स्टेशन ‘हेलो हल्द्वानी 91.2 एफएम’ ने इस दिशा में कदम उठाते हुए कुमाऊंनी के बाद गढ़वाली भाषा में भी प्रसारण शुरू कर दिया है।
इस पहल का उद्देश्य प्रदेश की स्थानीय भाषाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना और नई पीढ़ी को अपनी भाषाई विरासत, लोकसंस्कृति तथा परंपराओं से जोड़ना है। प्रधानमंत्री के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम को स्थानीय भाषाओं में प्रसारित करने से पहाड़ के लोगों को अपनी मातृभाषा में कार्यक्रम सुनने का अवसर मिलेगा।
कुमाऊंनी के बाद गढ़वाली में भी शुरू हुआ प्रसारण
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय लंबे समय से सामुदायिक रेडियो के माध्यम से स्थानीय समुदायों तक उपयोगी जानकारियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में रेडियो स्टेशन ‘हेलो हल्द्वानी 91.2 एफएम’ पर पहले कुमाऊंनी भाषा में प्रसारण शुरू किया गया था। अब इस पहल का विस्तार करते हुए गढ़वाली भाषा को भी इसमें शामिल कर लिया गया है।
विश्वविद्यालय की इस पहल से उत्तराखंड की दोनों प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं को रेडियो के माध्यम से व्यापक मंच मिलने की उम्मीद है। स्थानीय भाषाओं में कार्यक्रमों का प्रसारण न केवल श्रोताओं के लिए सहज होगा, बल्कि इनके संरक्षण और प्रचार-प्रसार में भी सहायक साबित हो सकता है।
रविवार से ‘मन की बात’ का क्षेत्रीय भाषाओं में प्रसारण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषा में रूपांतरण कर प्रसारण शुरू कर दिया गया है। इसकी शुरुआत रविवार को प्रसारित हुए कार्यक्रम से की गई।
विश्वविद्यालय के रेडियो प्रभारी प्रो. राकेश चंद्र रयाल के अनुसार, कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी के निर्देशन में इस पहल का शुभारंभ किया गया है। इसके तहत प्रत्येक रविवार को निर्धारित समय पर दोनों भाषाओं में कार्यक्रम प्रसारित किया जाएगा।
जानिए प्रसारण का समय
रेडियो स्टेशन ‘हेलो हल्द्वानी 91.2 एफएम’ पर कार्यक्रम सुनने के लिए समय निर्धारित किया गया है।
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शाम 7:00 बजे: कुमाऊंनी भाषा में ‘मन की बात’
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शाम 7:30 बजे: गढ़वाली भाषा में ‘मन की बात’
इस व्यवस्था से कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र के श्रोता अपनी-अपनी क्षेत्रीय भाषा में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को सुन सकेंगे।
लोकभाषाओं के संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
उत्तराखंड की गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषाएं यहां की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लोकगीतों, लोककथाओं, रीति-रिवाजों और पारंपरिक जीवनशैली के साथ इन भाषाओं का गहरा जुड़ाव है। बदलते समय में इन भाषाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और इनके नियमित उपयोग को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऐसे में सामुदायिक रेडियो के माध्यम से लोकप्रिय कार्यक्रमों को स्थानीय भाषाओं में प्रस्तुत करना एक प्रभावी माध्यम बन सकता है। इससे क्षेत्रीय भाषाओं के प्रति लोगों की रुचि बढ़ने के साथ ही स्थानीय संस्कृति को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की यह पहल प्रदेश की भाषाई विविधता को सम्मान देने और लोकभाषाओं को जनसंचार के माध्यम से आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।





