देहरादून। उत्तराखंड में मदरसों को अल्पसंख्यक विद्यालय के रूप में मान्यता देने की प्रक्रिया में अब तक 60 मदरसों को मान्यता मिल चुकी है। शिक्षा विभाग के पोर्टल पर आवेदन की निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के साथ ही इस प्रक्रिया का एक चरण पूरा हो गया है।
राज्य में मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव 1 जुलाई 2026 से हुआ, जब मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था लागू की गई। नई व्यवस्था के तहत अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थानों को निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से मान्यता लेने का प्रावधान किया गया है।
198 मदरसों ने किया आवेदन
जानकारी के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने के बाद करीब तीन महीने की अवधि में शिक्षा विभाग को कुल 198 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 60 मदरसों को अल्पसंख्यक विद्यालय के रूप में मान्यता दी जा चुकी है, जबकि 138 आवेदन अभी लंबित बताए जा रहे हैं।
मान्यता प्राप्त 60 संस्थानों में से 35 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किए जा चुके हैं, जबकि शेष 25 संस्थानों को प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया जारी है।
30 सितंबर तक मान्यता लेने की थी समयसीमा
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने मदरसों को निर्धारित समयसीमा के भीतर मान्यता लेने के निर्देश दिए थे। अगस्त में प्राधिकरण ने मदरसों से रिकॉर्ड भी तलब किया था और 30 सितंबर तक मान्यता लेने को कहा था।
नई व्यवस्था का उद्देश्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को निर्धारित नियमों के तहत लाना और उनकी शैक्षिक व्यवस्था के लिए नियामकीय ढांचा तैयार करना है। राज्य के नए कानून में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने को उद्देश्य के रूप में उल्लेखित किया गया है।
अब शिक्षा विभाग के सामने लंबित 138 आवेदनों की जांच और मान्यता प्रक्रिया पूरी करने की चुनौती है। इन आवेदनों पर आगे की कार्रवाई के बाद राज्य में मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक विद्यालयों की संख्या में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।




