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Prem Nagar: हेमा मालिनी और राजेश खन्ना की दस बेहतरीन फिल्में, प्रेम नगर के 50 साल पूरे हो गए

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दर्शक बड़े पर्दे पर ऐसी कई जोड़ियां देखना चाहते हैं। आज हम एक ऐसी जोड़ी की बात करेंगे जिन्होंने 10 से अधिक फिल्मों में काम किया है। उनकी अधिकांश फिल्में भी सुपरहिट हुईं। यहां राजेश खन्ना और हेमा मालिनी की बात हो रही है। इन दोनों की बेहतरीन केमेस्ट्री को लोगों ने इतना पसंद किया कि फिल्म मेकर्स ने उनसे कई फिल्में बनाईं। आज हेमा-राजेश की फिल्म प्रेम नगर का सिल्वर जुबली है। आइए हेमा-राजेश की सर्वश्रेष्ठ दस फिल्मों के बारे में जानें।

प्रेम नगर
1974 में एस प्रकाश राव की प्रेम नगर फिल्म रिलीज हुई। आज इस फिल्म को रिलीज हुए पूरे पच्चीस वर्ष हो गए हैं। डी रामानायडू ने इस फिल्म का निर्माण किया था। राजेश खन्ना, हेमा मालिनी, अरुणा ईरानी, अशोक कुमार, कामिनी कौशल, प्रेम चोपड़ा, असरानी और डेविड अब्राहम ने इसमें महत्वपूर्ण योगदान दिया था। आज इस फिल्म को रिलीज हुए पूरे पच्चीस वर्ष हो गए हैं। फिल्म में अभिनेता डेविड ने नकारात्मक भूमिका निभाई थी। फिल्म में राजकुमार करण (राजेश खन्ना) को मूर्ख बनाकर उसकी संपत्ति लूट ली जाती है और उसके भाई (प्रेम चोपड़ा) को दी जाती है। फिल्म का संगीत सचिन देव बर्मन का है। इस फ़िल्म बॉक्स ऑफिस सुपरहिट रही थी। निर्माता डी. रामानायडू ने इस फिल्म को तीन भाषाओं में बनाया था।

कुदरत
1981 में आई राजेश खन्ना और हेमा की फिल्म ‘कुदरत’ को चेतन आनंद ने निर्देशित किया था। इसका पटकथा भी चेतन आनन्द ने लिखी थी। फिल्म में राजेश खन्ना और हेमा मालिनी के अलावा राज कुमार, प्रिया राजवंश और विनोद खन्ना सहायक भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म ‘महबूबा’ के बाद यह राजेश और हेमा की दूसरी फिल्म थी। इस फिल्म में बेहतरीन अभिनय के लिए राजेश खन्ना को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। फिल्म की कहानी के लिए को फिल्मफेयर की ओर से सर्वश्रेष्ठ कहानी का पुरस्कार भी मिला था।

महबूबा
1976 में आई फिल्म ‘महबूबा’ एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी। यह फिल्म शक्ति सामंत द्वारा निर्देशित है। फिल्म में राजेश खन्ना, हेमा मालिनी और प्रेम चोपड़ा ने अहम भूमिका निभाई थी। फिल्म की कहानी पुनर्जन्म के विषय पर आधारित है। इस फिल्म में संगीत राहुल देव बर्मन का है। लता मंगेशकर और किशोर कुमार द्वारा गए गाने ‘मेरे नैना सावन भादों’ और ‘परबत के पीछे’ काफी लोकप्रिय हुआ था। यह फिल्म गुलशन नंदा के उपन्यास ‘सिसकते साज’ पर आधारित है। फिल्म की पटकथा गुलशन नंदा ने लिखी थी।

अंदाज

1971 में रमेश सिप्पी द्वारा निर्देशित फिल्म ‘अंदाज’ रिलीज हुई। यह रमेश सिप्पी की पहली फिल्म थी। सलीम-जावेद, गुलजार और सचिन भौमिक को फिल्म की पटकथा का पूरा श्रेय जाता है। 1971 की पांचवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी राजेश खन्ना की यह फिल्म। इसमें राजेश खन्ना, हेमा और शम्मी कपूर के अलावा राजेश खन्ना, सिमी गरेवाल और शम्मी कपूर भी अहम भूमिकाओं में थे।

बंदिश
1980 में बंदिश आई थी। यह फिल्म के. बापैया ने निर्देशित की थी। इस फिल्म में राजेश खन्ना, हेमा मालिनी और डैनी डेन्जोंगपा भी थे। यह फिल्म डी.रामा नायडू की पहली व्यावसायिक फिल्म थी, जिन्होंने 1974 में राजेश-हेमा को लेकर फिल्म ‘प्रेम नगर’ बनाई थी। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने इस फिल्म का संगीत दिया है। यह फिल्म वर्ष की आठवीं सबसे अधिक कमाई वाली फिल्म थी। मधुर गीतों और अनोखी कहानी ने फिल्म को सराहा। यह तेलुगु फिल्म चिलिपि कृष्णुडु का रीमेक था।

दर्द

1981 में आई फिल्म ‘दर्द’ एक क्राइम ड्रामा फिल्म थी। इस फिल्म का निर्देशन अम्बरीश संगल ने किया था। फिल्म में राजेश खन्ना का डबल रोल है। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही थी। इस फिल्म में राजेश के अभिनय के लिए 1982 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था।

राजपूत

राजपूत एक हिंदी रोमांटिक एक्शन ड्रामा फिल्म है जो 1982 में रिलीज़ हुई थी। धर्मेंद्र, राजेश खन्ना, विनोद खन्ना, हेमा मालिनी, टीना मुनीम और रंजीता कौर ने इस फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थीं। विजय आनंद इसका निर्देशक था। इस फिल्म को बनाने में कई साल लग गए थे, लेकिन देरी के बावजूद समीक्षकों ने इसे बहुत पसंद किया और यह रिलीज होते ही हिट साबित हुई। यह 1982 की नौवीं सबसे बड़ी फिल्म थी।

पलकों की छांव में 
1977 में रिलीज हुई ‘पलकों की छांव में’ एक ड्रामा फिल्म थी। इसे नव संपति प्रोडक्शंस के बैनर तले नरीमन बारिया और ए. खलिया द्वारा निर्मित किया था। इस फिल्म को मेराज ने निर्देशित किया था। फिल्म में राजेश खन्ना , हेमा मालिनी हैं जबकि जीतेंद्र ने इसमें विशेष भूमिका निभाई थी। फिल्म में संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का है। फिल्म को समीक्षकों द्वारा सराहा गया था।

बाबू
1985 में रिलीज हुई राजेश खन्ना अभिनीत फिल्म ‘बाबू’ में हेमा मालिनी, माला सिन्हा, रति अग्निहोत्री और दीपक पाराशर ने अभनिय किया था। इस फिल्म में संगीत राजेश रोशन का है। यह एसी तिरुलोकचंदर द्वारा निर्देशित और शिवाजी गणेशन द्वारा अभिनीत 1971 की इसी नाम की एक तमिल फिल्म की रीमेक है।

सीतापुर की गीता 
1987 में आई ‘सीतापुर की गीता’ में हेमा मालिनी, राजेश खन्ना और प्राण ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म का संगीत सोनिक ओमी की जोड़ी ने तैयार किया था। ग्रामीण पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म उत्तर और पूर्वी भारत में सबसे ज्यादा सफल हुई थी। इस फिल्म का सबसे मशहूर गाना ‘लचक लचक लचक जाए जवानी’, जिसे अमित कुमार और आशा भोसले ने गाया है।