उत्तराखंड में हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा से कांग्रेस में बढ़ी हलचल, चुनावी रणनीति और नेतृत्व को लेकर उठे सवाल

0
1

देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा को लेकर पार्टी के अंदर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से यात्रा को लेकर आपत्ति जताए जाने के बावजूद रावत के कार्यक्रम आगे बढ़ने से प्रदेश संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

दरअसल, कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है और प्रदेश में चुनावी अभियान को सामूहिक नेतृत्व तथा संगठनात्मक समन्वय के साथ आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसी बीच हरीश रावत की अलग से निकाली जा रही जनसंवाद यात्रा ने पार्टी की रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने भी यात्रा को लेकर आपत्ति जताई है।

हाईकमान की आपत्ति के बावजूद आगे बढ़ी यात्रा

रिपोर्टों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व ने हरीश रावत से प्रदेश कांग्रेस के समानांतर किसी यात्रा को आगे नहीं बढ़ाने को कहा था। नेतृत्व का तर्क था कि चुनावी तैयारियों के महत्वपूर्ण दौर में अलग-अलग स्तर पर चलने वाली राजनीतिक गतिविधियों से संगठनात्मक समन्वय प्रभावित हो सकता है। इसके बावजूद रावत ने अपनी जनसंवाद यात्रा जारी रखी।

इस घटनाक्रम ने उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान को फिर चर्चा में ला दिया है। पार्टी में पहले भी नेतृत्व, संगठन में जिम्मेदारियों और चुनावी तैयारियों को लेकर अलग-अलग नेताओं के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। अप्रैल 2026 में भी पार्टी के भीतर गुटीय खींचतान को लेकर खबरें सामने आई थीं।

टिकट और संगठन में भूमिका को लेकर भी चर्चा

हरीश रावत की सक्रियता ऐसे समय में बढ़ी है जब कांग्रेस विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को मजबूत करने और संभावित उम्मीदवारों की तैयारियों में जुटी है। टिकट वितरण, संगठन में नेताओं की भूमिका और चुनावी अभियान की कमान जैसे मुद्दे आने वाले समय में पार्टी के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

हालांकि, हरीश रावत पहले भी सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि कांग्रेस में नए लोगों को मौका मिलना चाहिए और उन्होंने अप्रैल 2026 में कहा था कि उन्हें अब न पद चाहिए और न टिकट।

वहीं सितंबर में रावत ने कांग्रेस के दो महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। यह घटनाक्रम उनके पूर्व सहयोगी से जुड़े ईडी प्रकरण के बीच सामने आया था और इसके बाद भी पार्टी के भीतर उनके राजनीतिक भविष्य तथा संगठन से संबंधों को लेकर चर्चा तेज हुई।

कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों के लिए बनाई समितियां

कांग्रेस हाईकमान ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत अगस्त 2026 में पांच समितियों का गठन भी किया था। इन समितियों को चुनाव से जुड़े अलग-अलग दायित्व सौंपे गए हैं। ऐसे में पार्टी का प्रयास संगठनात्मक स्तर पर चुनावी तैयारियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने का है।

इसी पृष्ठभूमि में हरीश रावत की यात्रा को लेकर विवाद सामने आना कांग्रेस के लिए संगठनात्मक समन्वय का मुद्दा बन गया है। एक तरफ पार्टी को बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करना है, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल बनाए रखना भी जरूरी होगा।

प्रदेश नेतृत्व ने गुटबाजी से किया इनकार

हालांकि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पार्टी में किसी तरह की अंतर्कलह से इनकार किया है। सितंबर में उन्होंने कहा था कि हरीश रावत वरिष्ठ नेता हैं और संगठन चुनाव की तैयारियों में एकजुट होकर काम कर रहा है।

इसके बावजूद हालिया घटनाक्रम ने प्रदेश कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और चुनावी अभियान के संचालन को लेकर बहस तेज कर दी है। मीडिया रिपोर्टों में इसे पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं के बीच मतभेद के रूप में देखा जा रहा है, जबकि कांग्रेस नेतृत्व सार्वजनिक रूप से संगठन की एकजुटता पर जोर दे रहा है।

चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में अब समय कम होता जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस के सामने एक ओर भाजपा सरकार के खिलाफ अपने मुद्दों को जनता तक पहुंचाने और चुनावी अभियान को गति देने की चुनौती है, तो दूसरी ओर पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने की जरूरत भी है।

हरीश रावत उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और पूर्व मुख्यमंत्री होने के कारण पार्टी की राज्य इकाई में उनका राजनीतिक प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में उनकी गतिविधियों और पार्टी नेतृत्व के फैसलों के बीच तालमेल आने वाले महीनों में कांग्रेस की चुनावी तैयारियों का अहम हिस्सा रहेगा।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा और कांग्रेस हाईकमान की सामूहिक चुनावी रणनीति के बीच किस तरह का समन्वय बनता है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व और रावत के बीच बातचीत से इस विवाद की दिशा स्पष्ट हो सकती है।