खटीमा। वक्फ जामा मस्जिद एवं मदरसा रहमानिया की संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद ने अब कानूनी रूप ले लिया है। वर्ष 2020 की तत्कालीन प्रबंध समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष समेत कुल 13 पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ खटीमा कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इन पर वक्फ संपत्तियों के संचालन में कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।
2020 में हुई थी अनियमितताओं की जांच
मामला वर्ष 2020 का है। वक्फ जामा मस्जिद और मदरसा रहमानिया से संबंधित संपत्तियों के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद तत्कालीन खटीमा एसडीएम स्तर से जांच कराई गई थी। एसडीएम ने 12 जून 2020 को जांच रिपोर्ट वक्फ बोर्ड के कार्यपालक को भेजी थी।
इसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा। मार्च 2026 में हाई कोर्ट ने वक्फ बोर्ड को मामले की जांच पूरी कर निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की ओर से मामले में आगे की कार्रवाई की गई।
दुकानों के आवंटन से लेकर करोड़ों के लेनदेन पर सवाल
वक्फ बोर्ड की जांच और मुख्य कार्यपालक अधिकारी के आदेश के आधार पर दर्ज शिकायत में संपत्तियों के संचालन को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दुकानों के आवंटन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने, निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितता बरतने और किराया निर्धारण एवं वसूली में नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बिना आवश्यक अनुमति के करीब 1.47 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त की गई। इसके अलावा वक्फ संपत्तियों से जुड़े अभिलेखों को नष्ट किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
12 दुकानों के आवंटन को लेकर पहले भी उठे थे सवाल
इस मामले में वक्फ बोर्ड पहले ही जामा मस्जिद और मदरसा रहमानिया से जुड़ी 12 दुकानों के आवंटन को नियम विरुद्ध मान चुका है। अगस्त 2026 में बोर्ड ने संबंधित दुकानदारों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए थे। बोर्ड की कार्रवाई में पूर्व प्रबंध समिति के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए थे।
13 पूर्व पदाधिकारी नामजद, पुलिस जांच जारी
मामले में तत्कालीन प्रबंध समिति से जुड़े कुल 13 लोगों को नामजद किया गया है। प्राथमिकी उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के प्रशासक कामिल खान की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर दर्ज की गई है। खटीमा कोतवाली पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
फिलहाल प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस स्तर पर जारी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।




