भोर चार बजे से ही घाटों पर पहुंचने लगे श्रद्धालु, सूरजकुंड, अग्निकुंड और नारदकुंड में स्नान के बाद की पूजा-अर्चना; बारिश से सरयू का पानी गंदा होने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था रही अटूट
बागेश्वर। शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार को उत्तराखंड के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। मां दुर्गा की आराधना के साथ ही लोगों ने पवित्र नदियों और संगमों में स्नान कर पूजा-अर्चना की। बागेश्वर में सरयू और गोमती नदियों के संगम पर तड़के से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। सुबह चार बजे से ही घाटों पर लोगों की भीड़ जुटने लगी और दिन चढ़ने के साथ धार्मिक गतिविधियां तेज हो गईं।
नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं ने स्नान, पूजन और जल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिरों में दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना रहा और श्रद्धालु पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना में जुटे रहे।
सरयू-गोमती संगम पर सुबह से जुटे श्रद्धालु
बागेश्वर में सरयू-गोमती संगम का धार्मिक महत्व है। शारदीय नवरात्र के पहले दिन यहां स्नान करने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचे। भोर से ही संगम क्षेत्र में लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर पूजा-अर्चना की और अपने परिवार की सुख-शांति तथा समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
संगम के अलावा सूरजकुंड, राधाकृष्ण मंदिर के समीप स्थित संगम, अग्निकुंड और नारदकुंड सहित विभिन्न घाटों पर भी लोगों ने स्नान किया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने मंदिरों में जाकर देवी-देवताओं के दर्शन किए और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
बारिश के बाद भी श्रद्धालुओं की आस्था रही अटूट
कपकोट क्षेत्र में हुई बारिश के कारण सरयू नदी का पानी गंदा हो गया था। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कमी नहीं आई और लोग स्नान तथा पूजा-अर्चना के लिए घाटों पर पहुंचते रहे।
हालांकि, नदी के पानी की स्थिति के बावजूद धार्मिक परंपराओं के प्रति लोगों का उत्साह बना रहा। श्रद्धालुओं ने संगम से कलश में जल भरा और उसे अपने घर ले गए। इस जल का उपयोग घरों में देवी-देवताओं के अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाएगा।
कलश में जल भरकर घर ले गए श्रद्धालु
नवरात्र के पहले दिन संगम पर स्नान के साथ पवित्र जल घर ले जाने की परंपरा भी देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने सरयू-गोमती संगम से कलश में जल एकत्र किया। मान्यता के अनुसार, इस जल का उपयोग पूजा-पाठ और देवी-देवताओं के अभिषेक में किया जाता है।
घाटों पर श्रद्धालु धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजा करते नजर आए। कई लोगों ने स्नान के बाद मंदिरों में दर्शन किए और नवरात्र के पहले दिन की पूजा संपन्न की।
मंदिरों में दर्शन के लिए उमड़ी भीड़
शारदीय नवरात्र के शुभारंभ के साथ ही उत्तराखंड के विभिन्न मंदिरों में भक्तों की आवाजाही बढ़ गई। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर नौ दिनों तक चलने वाले पर्व की शुरुआत की। मंदिरों में दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भक्तिमय वातावरण बना रहा।
बागेश्वर में सरयू-गोमती संगम पर उमड़ी भीड़ ने पर्व के प्रति लोगों की धार्मिक आस्था को दर्शाया। सुबह से ही घाटों पर पहुंचकर स्नान और पूजा करने वाले श्रद्धालुओं का सिलसिला जारी रहा।
शारदीय नवरात्र के पहले दिन बागेश्वर में संगम स्नान, मंदिरों में दर्शन और घरों के लिए पवित्र जल ले जाने की परंपराओं के बीच धार्मिक उत्साह देखने को मिला। बारिश के कारण नदी का पानी गंदा होने के बावजूद श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे और नवरात्र की शुरुआत आस्था के साथ की।





