देहरादून में बड़ी साइबर ठगी: बुजुर्ग दंपती को 50 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 45.87 लाख रुपये ठगे

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खुद को ATS और महाराष्ट्र क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर डराया, आतंकी हमले में संलिप्तता का आरोप लगाकर बनाया दबाव; प्रेमनगर थाने में मुकदमा दर्ज

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में साइबर ठगी का गंभीर मामला सामने आया है। प्रेमनगर निवासी आईटीसी कंपनी के सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिक और उनकी पत्नी को साइबर ठगों ने कथित तौर पर 50 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर भयभीत कर 45.87 लाख रुपये ठग लिए। आरोपितों ने खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) और महाराष्ट्र क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर दंपती को आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता और गिरफ्तारी का डर दिखाया। मामले में प्रेमनगर थाने में अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

पीड़ित अजयपाल के अनुसार, 16 अगस्त को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को मुंबई स्थित एटीएस मुख्यालय और महाराष्ट्र क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। आरोपितों में से एक ने अपना नाम सब इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताया और जांच के नाम पर दंपती से बातचीत शुरू की।

आतंकी हमले में संलिप्तता का आरोप लगाकर डराया

पीड़ित के मुताबिक, साइबर ठगों ने दावा किया कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आतंकी हमले में किया गया है। इस आरोप के बाद दंपती से उनके बच्चों के बारे में जानकारी और उनकी लोकेशन पूछी गई। आरोपितों ने उनके एक बेटे के विदेश में रहने की जानकारी का हवाला देते हुए उसकी जान को खतरा होने की बात कही। इससे दंपती भयभीत हो गए और आरोपितों के दबाव में आ गए।

50 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बनाया दबाव

आरोपितों ने खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर दंपती को लगातार डराए रखा। गिरफ्तारी और गंभीर आपराधिक मामले में फंसने की आशंका दिखाकर उन पर दबाव बनाया गया। इस दौरान दंपती कथित तौर पर 50 दिनों तक ठगों के निर्देशों के प्रभाव में रहे और अपनी परेशानी के बारे में किसी को बताने से बचते रहे।

45.87 लाख रुपये की ठगी, पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

इस पूरे घटनाक्रम में बुजुर्ग दंपती से कुल 45.87 लाख रुपये ठग लिए गए। मामले की जानकारी सामने आने के बाद प्रेमनगर थाने में अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है और ठगी में शामिल लोगों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

साइबर अपराध के ऐसे मामलों में ठग अक्सर पुलिस, जांच एजेंसियों या सरकारी अधिकारियों का रूप धारण कर लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। ध्यान रखें कि फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट करने की मांग वैध कानूनी प्रक्रिया नहीं है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय संबंधित पुलिस थाने या साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए।