देहरादून में छह साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना ने जहां महिला एवं बाल सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है, वहीं पीड़िता को समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने में हुई देरी ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि 15 वर्षीय किशोर ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद पुलिस ने पीड़िता की चिकित्सकीय जांच कराने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन इस दौरान बच्ची को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर लगाने पड़े।
मेडिकल जांच के लिए पहले कोरोनेशन अस्पताल पहुंची पुलिस
जानकारी के अनुसार, मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस छह वर्षीय बच्ची को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए जिला चिकित्सालय (कोरोनेशन अस्पताल) लेकर पहुंची। यहां बच्ची की मेडिकल जांच कराई जानी थी, लेकिन अस्पताल में पीडियाट्रिक एनेस्थेटिस्ट (बाल रोग विशेषज्ञ एनेस्थीसिया चिकित्सक) उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। इसके चलते अस्पताल में तत्काल जांच पूरी नहीं हो सकी और बच्ची को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया।
दून अस्पताल में भी पूरी नहीं हो सकी जांच
इसके बाद पुलिस बच्ची को लेकर दून अस्पताल पहुंची। उम्मीद थी कि यहां आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध होने से पीड़िता की जांच पूरी हो जाएगी, लेकिन यहां भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप बच्ची को दोबारा कोरोनेशन अस्पताल भेजना पड़ा। इस तरह एक संवेदनशील मामले में मेडिकल जांच के लिए मासूम को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक ले जाना पड़ा।
स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
इस घटनाक्रम ने सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन चिकित्सकीय सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। छह साल की बच्ची पहले ही गंभीर मानसिक और शारीरिक आघात से गुजर रही थी। ऐसे में उसे समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों की प्राथमिकता होनी चाहिए थी।
बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के मामलों में समय पर चिकित्सकीय परीक्षण, संवेदनशील व्यवहार और पीड़ित के अनुकूल व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसी परिस्थितियों में अस्पतालों के बीच समन्वय की कमी पीड़ित परिवार की परेशानी बढ़ा सकती है। साथ ही, यह भी जरूरी है कि बच्ची को बार-बार अस्पताल ले जाने की स्थिति पैदा न हो और सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाए।
फिलहाल इस मामले में बच्ची की चिकित्सकीय जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। घटना के साथ-साथ मेडिकल जांच के दौरान सामने आई अव्यवस्थाओं को लेकर भी संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत है। मासूम को उचित उपचार, सुरक्षा और मनोवैज्ञानिक सहयोग उपलब्ध कराना इस समय सबसे महत्वपूर्ण है।





