एमबीपीजी छात्रसंघ चुनाव: बेटे के चुनावी रण में पिता बने सारथी, आर्यन बेलवाल ने निर्दलीय अध्यक्ष पद पर दर्ज की जीत

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हल्द्वानी। एमबीपीजी कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव में इस बार मुकाबला खास रहा। विद्यार्थियों ने निर्दलीय प्रत्याशी आर्यन बेलवाल को छात्रसंघ अध्यक्ष की कमान सौंपी। आर्यन की जीत इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पिछले 16 वर्षों में वह कॉलेज के पांचवें निर्दलीय छात्रसंघ अध्यक्ष बने हैं।

आर्यन की चुनावी जीत के पीछे उनके पिता कृष्ण चंद्र बेलवाल की भूमिका भी खास रही। चुनावी अभियान के दौरान पिता ने बेटे की पूरी चुनावी कमान संभाली और लगातार उसके साथ खड़े नजर आए। इसी वजह से चुनावी माहौल में पिता-पुत्र की यह जोड़ी चर्चा का विषय बनी रही।

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पिता ने निभाई ‘सारथी’ की भूमिका

चुनावी रण में कृष्ण चंद्र बेलवाल ने अपने बेटे आर्यन के लिए सारथी की भूमिका निभाई। उन्होंने चुनावी रणनीति से लेकर प्रचार अभियान तक में बेटे का साथ दिया। जिस तरह महाभारत में श्रीकृष्ण ने अर्जुन का सारथी बनकर मार्गदर्शन किया था, उसी तरह कृष्ण चंद्र बेलवाल ने भी आर्यन के चुनावी अभियान को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आर्यन ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरकर जीत हासिल की और एक बार फिर यह दिखाया कि एमबीपीजी कॉलेज की छात्र राजनीति में निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी मजबूत जगह बना सकते हैं।

16 साल में पांचवें निर्दलीय अध्यक्ष

एमबीपीजी कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव के इतिहास में आर्यन बेलवाल की जीत एक अलग पहचान रखती है। 16 वर्षों के दौरान वह पांचवें निर्दलीय प्रत्याशी हैं, जिन्होंने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की है।

आर्यन की जीत के बाद उनके समर्थकों में उत्साह का माहौल रहा। कॉलेज की छात्र राजनीति में अब नए अध्यक्ष के सामने विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को उठाने और छात्र हितों के लिए काम करने की जिम्मेदारी होगी।