नई टिहरी। टिहरी बांध विस्थापित और प्रभावितों का आंदोलन लगातार जारी है। दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर प्रदर्शनकारियों ने मंदिर में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर अपनी मांगों को पूरा करने की प्रार्थना की और इसके बाद धरना स्थल पर अपने आंदोलन को जारी रखा।
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Toggleमंदिर में पूजा कर मांगी मांगों की पूर्ति की मन्नत
धरने का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सागर भंडारी ने बताया कि चैत्र नवरात्र अष्टमी के दिन वे धरना स्थल के समीप स्थित जानकी मंदिर पहुंचे। वहां उन्होंने मां दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना कर बांध प्रभावितों की समस्याओं के समाधान की कामना की। उन्होंने कहा कि जब प्रशासन उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है, तो उन्हें भगवान की शरण में जाना पड़ा है।
महिलाओं ने पूजा के बाद धरना स्थल पर तोड़ा उपवास
दुर्गा अष्टमी के मौके पर बांध प्रभावित महिलाओं ने अपने घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना करने के बाद धरना स्थल पर ही उपवास तोड़ा। महिलाओं ने कहा कि यह आंदोलन उनकी बुनियादी जरूरतों और अधिकारों के लिए है।
12% रॉयल्टी पर पहला अधिकार स्थानीय लोगों का
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि टिहरी बांध से मिलने वाली 12 प्रतिशत रॉयल्टी पर पहला अधिकार विस्थापित और प्रभावित परिवारों के साथ-साथ टिहरी के स्थानीय निवासियों का है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने देशहित में अपनी जमीन, विरासत और संस्कृति का त्याग किया, आज वही लोग बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक धरना जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
धरने में बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
इस दौरान धरना स्थल पर कई महिलाएं और पुरुष मौजूद रहे, जिन्होंने आंदोलन को समर्थन दिया। सभी ने एकजुट होकर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
निष्कर्ष:
टिहरी बांध प्रभावितों का यह आंदोलन उनके अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं की लड़ाई को दर्शाता है। अब देखना होगा कि प्रशासन उनकी मांगों पर कब तक कार्रवाई करता है।




