नैनीताल/हल्द्वानी। नितिन लोहनी हत्याकांड में ढाई महीने बीत जाने के बावजूद पुलिस अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी है। जांच में हो रही देरी को लेकर परिजनों में भारी आक्रोश है और उन्होंने मामले की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रायल की मांग उठाई है।
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Toggleचार जनवरी को हुई थी गोली मारकर हत्या
हल्द्वानी के रामपुर रोड स्थित एसकेएम स्कूल के पास चार जनवरी की रात नितिन लोहनी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतक जज फार्म क्षेत्र का निवासी था। घटना के बाद से ही परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है, लेकिन जांच की धीमी रफ्तार से उनके सब्र का बांध टूटता जा रहा है।
परिजनों की मांग: जल्द दाखिल हो चार्जशीट, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई
हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद मामले में प्रगति धीमी होने से परिवार असंतुष्ट है। नितिन के पिता कैलाश चंद्र लोहनी ने मांग की है कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाए और दोषियों को सख्त सजा दी जाए।
उन्होंने कहा कि हत्यारों को सश्रम आजीवन कारावास मिलना चाहिए, ताकि उन्हें उनके अपराध की कड़ी सजा मिल सके।
आरोपी की आत्मरक्षा की कहानी जांच में निकली झूठी
जांच के दौरान सामने आया कि मुख्य आरोपी पार्षद अमित बिष्ट ने आत्मरक्षा का झूठा दावा किया था। उसने घटना के बाद घर की खिड़की पर फायरिंग कर हमले का नाटक रचा और पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की।
हालांकि, फोरेंसिक जांच, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों से सच्चाई सामने आ गई और आरोपी की कहानी पूरी तरह गलत साबित हुई।
निहत्थे युवक को नजदीक से मारी गई गोली
पुलिस जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि नितिन लोहनी निहत्था था और उस पर बेहद करीब से गोली चलाई गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटनास्थल से कारतूस के खोखे बरामद हुए थे, जबकि सीसीटीवी डीवीआर छिपाने की भी कोशिश की गई थी।
साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी और उसके बेटे को हिरासत में लेकर पूरे मामले का खुलासा किया था।
न्याय की आस में परिवार, कार्रवाई में तेजी की जरूरत
मामले में अब तक चार्जशीट दाखिल न होने से न्याय प्रक्रिया में देरी हो रही है, जिससे परिजनों में निराशा बढ़ रही है। परिवार और स्थानीय लोगों की मांग है कि जांच प्रक्रिया को तेज कर जल्द से जल्द दोषियों को सजा दिलाई जाए।
निष्कर्ष:
नितिन लोहनी हत्याकांड न्याय व्यवस्था की गति पर सवाल खड़े करता है। समय पर चार्जशीट और त्वरित सुनवाई ही पीड़ित परिवार को न्याय दिला सकती है।




