रुद्रप्रयाग: कच्ची दुकानों के लॉटरी आवंटन के विरोध में व्यापारियों का आमरण अनशन शुरू

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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर कच्ची दुकानों के लॉटरी के माध्यम से आवंटन के फैसले के खिलाफ स्थानीय व्यापारियों का विरोध तेज हो गया है। ऊखीमठ तहसील परिसर में व्यापारियों ने अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन शुरू कर दिया है

24 घंटे का अल्टीमेटम खत्म, शुरू हुआ अनशन

व्यापारियों ने पहले प्रशासन को 24 घंटे का समय देते हुए आदेश निरस्त करने की मांग की थी। मांग पूरी न होने पर मंगलवार से उन्होंने तहसील परिसर में आमरण अनशन शुरू कर दिया। अनशन में संदीप पुष्पाण, वीरेंद्र सिंह, जसवंत सिंह, यशपाल सिंह, जसपाल सिंह, चंद्रमोहन सिंह और प्रेम सिंह शामिल हैं।

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लॉटरी प्रणाली से स्थानीय व्यापारियों को नुकसान का आरोप

प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों का कहना है कि वर्षों से गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर स्थानीय लोग ही कच्ची दुकानों और टेंटों का संचालन करते आ रहे हैं। इससे उनकी आजीविका चलती है और यात्रियों को सुविधाएं मिलती हैं।

उनका आरोप है कि लॉटरी प्रणाली लागू होने से कई पुराने व्यापारी इस व्यवस्था से बाहर हो जाएंगे, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा।

व्यापार मंडल ने दिया समर्थन

व्यापार मंडल ऊखीमठ ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है। इस दौरान राजीव भट्ट, महेश बत्र्वाल, सुषमा देवी, वीरेन्द्र गोस्वामी, गणेश लाल, मुकेश सिंह, बिजेंद्र राणा, महिपाल सिंह, पीएस राणा और सौरभ भट्ट सहित कई व्यापारी मौजूद रहे।


केदारनाथ यात्रा राजस्व को लेकर भी उठे सवाल

पूर्व विधायक ने सरकार पर साधा निशाना

रुद्रप्रयाग के पूर्व विधायक मनोज रावत ने केदारनाथ यात्रा से प्राप्त राजस्व के उपयोग को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद अब दुकानों के आवंटन में टेंडर प्रणाली लागू कर दी गई है, जिससे स्थानीय लोगों को नुकसान हो रहा है।

राजस्व उपयोग और नीतियों पर उठी आपत्ति

उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों से यात्रा से मिलने वाला राजस्व जिला पंचायत के बजाय प्रशासन के पास जा रहा है, लेकिन इसका उपयोग स्थानीय विकास कार्यों में नहीं हो रहा है।

मनोज रावत के अनुसार, घोड़ा-खच्चरों से करीब 40 करोड़ रुपये का टैक्स वसूला गया, लेकिन इसका लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल पाया। उन्होंने हेलिकॉप्टर सेवाओं से भी राजस्व वसूली की मांग की।

जांच की मांग

पूर्व विधायक ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि दुकानों के आवंटन और पंजीकरण के नाम पर गरीबों का शोषण हो रहा है। साथ ही उन्होंने बीमा सब्सिडी बंद करने के फैसले पर भी सवाल उठाए।