देहरादून। आज से चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो रही है। पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। लेकिन इस बार नवरात्र सिर्फ पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश भी दे रहा है—बेटियों को बचाने और सम्मान देने का संकल्प।
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Toggle📉 घटता लिंगानुपात बना चिंता का विषय
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड के 13 में से 11 जिलों में लिंगानुपात 950 से कम है
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कुछ जिलों में यह आंकड़ा 900 से भी नीचे पहुंच गया है
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यानी हर 1000 लड़कों पर 950 से भी कम लड़कियां
👉 यह स्थिति समाज में बढ़ते असंतुलन की ओर इशारा करती है।
⚠️ क्यों घट रही बेटियों की संख्या?
अधिकारियों के अनुसार मुख्य कारण:
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पलायन (Migration) – पहाड़ी क्षेत्रों से लोगों का बाहर जाना
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सामाजिक सोच और बेटियों को लेकर चुनौतियां
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रोजगार और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं
🙏 नवरात्र का असली संदेश
नवरात्र में हम देवी की पूजा करते हैं, लेकिन असली अर्थ तब है जब:
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बेटियों को भी वही सम्मान मिले
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समाज में लड़का-लड़की का संतुलन बना रहे
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हर घर में बेटियों को सुरक्षित और समान अवसर मिले
🌸 क्या करना होगा?
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जागरूकता बढ़ानी होगी
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बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा पर ध्यान देना होगा
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समाज को अपनी सोच बदलनी होगी
👉 सीधी बात:
इस नवरात्र सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि एक संकल्प भी जरूरी है —
“देवी की पूजा के साथ, हर बेटी का सम्मान।”




