अल्मोड़ा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 19 मार्च 2026 से हिंदू नवसंवत्सर (विक्रम संवत 2083) का शुभारंभ होगा। इस दिन चैत्र कृष्ण अमावस्या के समाप्त होते ही प्रातः काल में नववर्ष का आरंभ विशेष ग्रह-नक्षत्रों के संयोग में होगा।
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Toggleशुभ मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्रों का संयोग
ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद बल्लभ पांडेय के अनुसार, प्रातः लगभग 6:45 बजे उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, मीन राशि के चंद्रमा और मीन लग्न में नवसंवत्सर का शुभारंभ होगा। यह संयोग धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जा रहा है।
रौद्र संवत्सर रहेगा इस वर्ष का नाम
इस वर्ष के विक्रम संवत का नाम ‘रौद्र संवत्सर’ रखा गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस संवत्सर में ग्रहों की स्थिति विशेष प्रभाव डालती है।
ग्रहों का दिव्य मंत्रिमंडल
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष ग्रहों की स्थिति इस प्रकार रहेगी:
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देवगुरु बृहस्पति को राजा का स्थान प्राप्त होगा
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मंगल प्रमुख सलाहकार मंत्री होंगे
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बृहस्पति के पास ही वित्त मंत्रालय रहेगा
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चंद्रमा को रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलेगी
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सूर्य को कृषि और उद्यान विभाग सौंपा गया है
वर्ष के संभावित प्रभाव
वृहत संहिता के अनुसार रौद्र संवत्सर में राजनीतिक मतभेद, युद्ध, महंगाई, भ्रष्टाचार, धार्मिक विवाद और अग्निकांड जैसी स्थितियों की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि बृहस्पति के प्रभाव से शांति और संतुलन बनाए रखने के संकेत भी मिलते हैं।
अधिक मास में वर्जित रहेंगे मांगलिक कार्य
इस वर्ष 17 मई से 15 जून तक पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) रहेगा। इस अवधि में विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों को वर्जित माना गया है।
चैत्र नवरात्र का भी होगा शुभारंभ
इसी दिन वासंतिक चैत्र नवरात्र भी शुरू होंगे। सुबह 7 बजे से घटस्थापना के साथ मां जगदंबा की पूजा-अर्चना आरंभ की जाएगी, जिसमें श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से भाग लेंगे।




