उफनती नदी में दो सहेलियों की जान बचाने वाली माया कांडपाल को मिलेगा मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार

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चंपावत की 17 वर्षीय बेटी ने दिखाई अदम्य बहादुरी; घायल होने के बावजूद पहुंची स्कूल और दी परीक्षा, 6 नवंबर को मुख्यमंत्री करेंगे सम्मानित

चंपावत। विपरीत परिस्थितियों में साहस और मानवता की मिसाल पेश करने वाली चंपावत की माया कांडपाल को मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। 5 अगस्त 2025 को भारी बारिश के बीच उफनती नदी में बह रही अपनी दो सहेलियों की जान बचाने के लिए माया ने अपनी जान जोखिम में डालकर नदी में छलांग लगा दी थी। उनके इसी असाधारण साहस को देखते हुए उन्हें वर्ष 2026-27 के इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना गया है। 6 नवंबर को देहरादून में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उन्हें सम्मानित करेंगे।

भारी बारिश और भूस्खलन के बीच स्कूल जाने की चुनौती

माया कांडपाल, ग्राम घुरचुम, पोस्ट कोटा जमराड़ी निवासी भुवन चंद्र कांडपाल की पुत्री हैं। घटना के दिन क्षेत्र में भारी बारिश के कारण हालात बेहद खराब थे। जगह-जगह भूस्खलन हुआ था, पहाड़ियों से लगातार पत्थर गिर रहे थे और सड़क मार्ग बाधित हो गए थे। इसके बावजूद स्कूल में गृह परीक्षाएं चलने के कारण छात्राओं के सामने समय पर विद्यालय पहुंचने की चुनौती थी।

17 वर्षीय माया अपनी सहेलियों के साथ इन कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए स्कूल जा रही थीं। इसी दौरान उनकी सहेलियों आरती और कोमल ने स्कूल पहुंचने के लिए नदी पार करने का निर्णय लिया। नदी का बहाव तेज था और हालात खतरनाक थे।

सहेलियों को बहता देख नदी में लगा दी छलांग

नदी पार करते समय अचानक तेज बहाव में आरती और कोमल बहने लगीं। दोनों को संकट में देखकर माया ने एक पल की भी देरी नहीं की और अपनी जान की परवाह किए बिना उफनती नदी में छलांग लगा दी। उन्होंने पूरी ताकत और हिम्मत से प्रयास करते हुए दोनों सहेलियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

इस बचाव अभियान के दौरान माया खुद भी घायल हो गईं और उनकी चप्पलें भी नदी के तेज बहाव में बह गईं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। दोनों सहेलियों की जान बचाने के बाद माया चोटिल अवस्था में ही स्कूल पहुंचीं और अपनी निर्धारित परीक्षा भी दी।

पढ़ाई में भी हासिल किए 86.6 प्रतिशत अंक

माया का साहस केवल उस घटना तक सीमित नहीं रहा। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और वर्ष 2026 में इंटरमीडिएट की परीक्षा 86.6 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। उनका यह प्रदर्शन बताता है कि कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया।

जिला स्तरीय चयन समिति की संस्तुति पर हुआ चयन

माया के अदम्य साहस, तत्परता और मानवीय संवेदना को देखते हुए जिला स्तरीय चयन समिति की संस्तुति पर महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग ने उनका चयन मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार के लिए किया है। 6 नवंबर को देहरादून में होने वाले समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उन्हें सम्मानित करेंगे।

अपनी दो सहेलियों को नया जीवन देने वाली माया कांडपाल की कहानी साहस, सूझबूझ और दूसरों की मदद के जज्बे की प्रेरक मिसाल है। उनकी उपलब्धि ने चंपावत जिले को गौरवान्वित किया है।