हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर ठगी का बड़ा खेल, टीटी का ‘मामा’ बनकर मजदूरों को लगाया लाखों का चूना

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कुंभ एक्सप्रेस में एसी थर्ड का कन्फर्म टिकट दिलाने का दिया झांसा, मोबाइल और नकदी लेकर फरार हुए आरोपी; यूपीआई के जरिए खाते से 90 हजार रुपये से अधिक की रकम निकाली

हरिद्वार। हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से घर लौटने की तैयारी कर रहे पश्चिम बंगाल के दो मजदूर ठगी का शिकार हो गए। आरोपितों ने खुद को रेलवे के टीटी का रिश्तेदार बताते हुए मजदूरों को कुंभ एक्सप्रेस में एसी थर्ड क्लास का कन्फर्म टिकट दिलाने का भरोसा दिया। इसी झांसे में लेकर आरोपित उनका मोबाइल फोन, नकदी और सामान से भरा बैग लेकर फरार हो गए। इतना ही नहीं, पीड़ितों के बैंक खाते से यूपीआई के माध्यम से 90 हजार रुपये से अधिक की रकम भी निकाल ली गई। शिकायत के आधार पर जीआरपी ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

पश्चिम बंगाल के दो मजदूरों को बनाया निशाना

रेलवे पुलिस के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के रहने वाले बिस्वजीत सोरेन और रंजीत कोरा हरिद्वार में मजदूरी करते हैं। दोनों ट्रेन से अपने घर लौटने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान रेलवे स्टेशन पर उनकी मुलाकात कथित ठगों से हुई। आरोपितों ने यात्रियों का भरोसा जीतने के लिए रेलवे कर्मचारी यानी टीटी से पारिवारिक संबंध होने की बात कही।

आरोपितों ने दावा किया कि टीटी उनका मामा है और उसकी मदद से कुंभ एक्सप्रेस में एसी थर्ड क्लास का कन्फर्म टिकट आसानी से मिल सकता है। बेहतर श्रेणी में टिकट मिलने की उम्मीद में मजदूर आरोपितों के झांसे में आ गए।

कन्फर्म टिकट का भरोसा देकर सामान लेकर हुए फरार

आरोप है कि टिकट दिलाने का भरोसा देने के बाद आरोपितों ने दोनों मजदूरों को अपने विश्वास में ले लिया। इसी दौरान वे उनका मोबाइल फोन, नकदी और सामान से भरा बैग लेकर फरार हो गए। कुछ समय बाद मजदूरों को ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने आरोपितों की तलाश की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला।

घटना के बाद पीड़ितों को अपने सामान के साथ-साथ बैंक खाते में जमा रकम भी गंवाने का पता चला। आरोप है कि यूपीआई के माध्यम से उनके खाते से 90 हजार रुपये से अधिक की रकम निकाल ली गई। इससे दोनों मजदूरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

यूपीआई के जरिए खाते से निकाली रकम

इस मामले में डिजिटल भुगतान के माध्यम से हुई कथित धोखाधड़ी भी जांच का अहम हिस्सा है। पीड़ितों के खाते से निकाली गई रकम किन खातों में पहुंची, लेनदेन के लिए किन मोबाइल नंबरों या यूपीआई आईडी का इस्तेमाल किया गया और आरोपितों की पहचान कैसे की जा सकती है, इन बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी।

डिजिटल लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर आरोपितों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। हालांकि, रकम निकालने के तरीके और लेनदेन से जुड़े विस्तृत तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

जीआरपी ने दर्ज किया मुकदमा, आरोपितों की तलाश

रेलवे पुलिस के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जीआरपी की टीम आरोपितों की तलाश में जुटी है। मामले में रेलवे स्टेशन पर उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, पीड़ितों के बयान और बैंकिंग लेनदेन से जुड़े साक्ष्य जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

फिलहाल आरोपितों की गिरफ्तारी और ठगी गई रकम की बरामदगी के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम और आरोपितों की भूमिका की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

रेलवे स्टेशन पर सतर्क रहने की जरूरत

यह घटना रेल यात्रियों के लिए सतर्कता का संदेश भी देती है। रेलवे स्टेशन पर अनजान व्यक्तियों के टिकट दिलाने, कन्फर्म सीट उपलब्ध कराने या रेलवे कर्मचारियों से संबंध होने के दावों पर बिना सत्यापन भरोसा करना नुकसानदायक हो सकता है। यात्रियों को टिकट केवल अधिकृत माध्यमों से ही बुक कराना चाहिए और अनजान लोगों के साथ मोबाइल फोन, नकदी, बैंकिंग जानकारी या सामान साझा करने से बचना चाहिए।

यदि किसी यात्री के साथ डिजिटल भुगतान से जुड़ी धोखाधड़ी होती है, तो उसे तुरंत अपने बैंक और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। समय पर सूचना देने से संदिग्ध लेनदेन पर कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।