देहरादून में विश्व हिंदू परिषद के शताब्दी समारोह में राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख व्यक्तित्व अशोक सिंघल के योगदान को किया याद, हिंदू समाज को संगठित करने और देश की एकता के लिए उनके कार्यों पर डाला प्रकाश
देहरादून। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अशोक सिंघल के जीवन, विचारों और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन देश की एकता, हिंदू धर्म की रक्षा और हिंदू समाज को संगठित करने के लिए समर्पित रहा। देहरादून में आयोजित विश्व हिंदू परिषद के शताब्दी समारोह में उन्होंने अशोक सिंघल से जुड़े संस्मरण साझा किए और राम मंदिर आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
चंपत राय ने कहा कि उन्हें अशोक सिंघल के साथ कुछ समय बिताने का अवसर मिला था। उनके अनुसार, सिंघल केवल एक संगठनात्मक नेता ही नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने और बड़े राष्ट्रीय उद्देश्यों के लिए लोगों को प्रेरित करने वाले व्यक्तित्व थे। उनके विचारों और कार्यशैली का प्रभाव हिंदू समाज के संगठनात्मक प्रयासों में लंबे समय तक देखने को मिला।
2012 में ही नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की बात कही थी
चंपत राय ने अपने संबोधन में बताया कि अशोक सिंघल ने वर्ष 2012 में ही नेतृत्व परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर देते हुए नरेंद्र मोदी को पार्टी की कमान सौंपने की बात कही थी। उस समय उन्होंने विभिन्न राज्यों में भारतीय जनता पार्टी को मिलने वाली संभावित लोकसभा सीटों का आकलन भी प्रस्तुत किया था।
चंपत राय के मुताबिक, अशोक सिंघल ने अलग-अलग प्रांतों से भाजपा को मिलने वाली सीटों का जो अनुमान सामने रखा था, वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के परिणाम उसके करीब रहे। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने सिंघल की राजनीतिक परिस्थितियों को समझने की क्षमता और उनके आकलन का उल्लेख किया।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 282 सीटें जीतकर अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया था। इसके साथ ही नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनी। चंपत राय ने अपने संबोधन में वर्ष 2012 में सिंघल द्वारा व्यक्त किए गए विचारों और बाद के चुनाव परिणामों के बीच समानता का जिक्र किया।
राम मंदिर आंदोलन में रही महत्वपूर्ण भूमिका
अशोक सिंघल को राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेताओं में गिना जाता है। विश्व हिंदू परिषद के माध्यम से उन्होंने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के समर्थन में चले आंदोलन को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान उन्होंने विभिन्न धार्मिक संगठनों, संतों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को आंदोलन से जोड़ने के प्रयास किए।
राम मंदिर आंदोलन ने कई दशकों तक देश के सामाजिक और राजनीतिक विमर्श में महत्वपूर्ण स्थान बनाए रखा। इस आंदोलन के दौरान अशोक सिंघल ने धार्मिक सभाओं, जनसंपर्क अभियानों और संगठनात्मक गतिविधियों के माध्यम से अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
चंपत राय ने अपने संबोधन में सिंघल के योगदान को याद करते हुए उनके समर्पण और विचारधारा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सिंघल के लिए हिंदू समाज का संगठन और धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषय महत्वपूर्ण रहे।
हिंदू समाज को संगठित करने पर दिया जोर
चंपत राय के अनुसार, अशोक सिंघल का जीवन समाज को एकजुट करने और देश की एकता के लिए काम करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और विभिन्न क्षेत्रों में किए गए प्रयासों को याद किया।
विश्व हिंदू परिषद के शताब्दी समारोह में अशोक सिंघल के जीवन और कार्यों पर चर्चा को संगठन की ऐतिहासिक यात्रा और उसके प्रमुख व्यक्तित्वों के योगदान को याद करने के अवसर के रूप में देखा गया। कार्यक्रम में उनके विचारों, संगठनात्मक कार्यों और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से उनके सार्वजनिक जीवन को रेखांकित किया गया।
चंपत राय के संबोधन का प्रमुख संदेश यह रहा कि अशोक सिंघल ने अपने जीवन में हिंदू समाज के संगठन, राष्ट्र की एकता और राम मंदिर आंदोलन को प्राथमिकता दी। वर्ष 2012 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को लेकर उनके द्वारा व्यक्त किए गए विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सिंघल के राजनीतिक आकलन को भी याद किया।





