बागेश्वर। पहाड़ों में रोजगार के सीमित अवसरों और पलायन की चुनौती के बीच अब सौर ऊर्जा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने लगी है। बागेश्वर जिले के ओलखसों गांव में मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत 200 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। करीब एक करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करने के साथ ही गांव की आर्थिक गतिविधियों को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
उत्तराखंड में सौर ऊर्जा को स्वरोजगार के माध्यम के रूप में बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना लागू की गई है। योजना का उद्देश्य युवाओं, स्थानीय निवासियों और अन्य पात्र लाभार्थियों को सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर आय का साधन उपलब्ध कराना है। उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (UREDA) की वेबसाइट पर मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना से संबंधित योजना दस्तावेज और स्थापित सोलर पावर प्लांट की जानकारी उपलब्ध है।
ओलखसों गांव में स्थापित होगा 200 किलोवाट का संयंत्र
ओलखसों गांव में प्रस्तावित 200 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। परियोजना के पूरा होने के बाद सौर ऊर्जा का उत्पादन किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पहाड़ी क्षेत्रों में खेती और पारंपरिक रोजगार के सीमित विकल्पों के कारण ग्रामीण युवाओं को अक्सर रोजगार की तलाश में मैदानी शहरों या दूसरे राज्यों की ओर जाना पड़ता है। ऐसे में सौर ऊर्जा जैसी परियोजनाएं गांव में रहकर आय अर्जित करने का विकल्प उपलब्ध करा सकती हैं।
50 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान
मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में अनुदान की व्यवस्था शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार परियोजना की लागत में 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलने का प्रावधान है। इससे पात्र लाभार्थियों के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने में शुरुआती वित्तीय बोझ कम हो सकता है।
योजना के तहत सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए पात्रता, परियोजना क्षमता, वित्तीय सहायता और अन्य शर्तें निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू होती हैं। इसलिए इच्छुक लोगों को आवेदन से पहले UREDA के मौजूदा दिशा-निर्देशों और संबंधित विभाग से पात्रता की पुष्टि करनी चाहिए।
गांव में रहकर कमाई का बन सकता है जरिया
सौर ऊर्जा संयंत्र को केवल बिजली उत्पादन की परियोजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार और आय का स्थायी माध्यम भी बन सकता है। संयंत्र के संचालन, रखरखाव और इससे जुड़ी अन्य गतिविधियों में स्थानीय स्तर पर काम के अवसर पैदा हो सकते हैं।
उत्तराखंड के अन्य जिलों में भी मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत स्थापित सोलर प्लांट लोगों के लिए आय का जरिया बन रहे हैं। चंपावत में योजना के लाभार्थियों द्वारा सोलर पावर प्लांट से बिजली उत्पादन कर आय अर्जित करने की रिपोर्ट सामने आई है।
पहाड़ों में पलायन रोकने की दिशा में उम्मीद
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में पलायन लंबे समय से एक महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक चुनौती रहा है। रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में युवा शिक्षा और रोजगार के लिए शहरों की ओर जाते हैं।
ऐसे में यदि गांवों में ही सौर ऊर्जा, पर्यटन, कृषि प्रसंस्करण और अन्य स्वरोजगार आधारित गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है तो स्थानीय लोगों के लिए आय के नए विकल्प तैयार हो सकते हैं। ओलखसों में स्थापित किया जा रहा सोलर प्लांट इसी दिशा में एक उदाहरण बन सकता है।
सौर ऊर्जा से बढ़ेगा हरित ऊर्जा का उत्पादन
सौर ऊर्जा को अक्षय और स्वच्छ ऊर्जा के स्रोत के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना की शुरुआत भी युवाओं और वापस लौटे प्रवासियों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने तथा हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी।
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में पर्याप्त धूप वाले क्षेत्रों में सौर ऊर्जा परियोजनाओं की संभावनाएं मौजूद हैं। छोटे और मध्यम क्षमता वाले सोलर प्लांट स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन के साथ-साथ लोगों के लिए आय का माध्यम बन सकते हैं।
युवाओं के लिए स्वरोजगार का नया विकल्प
ओलखसों की परियोजना यह भी दिखाती है कि पहाड़ी क्षेत्रों में स्वरोजगार के पारंपरिक विकल्पों के साथ अब नवीकरणीय ऊर्जा को भी आर्थिक गतिविधि के रूप में अपनाया जा सकता है।
यदि योजना के तहत अधिक पात्र लोग सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करते हैं तो इससे ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश बढ़ने, रोजगार के अवसर बनने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है। साथ ही स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने से पर्यावरणीय दृष्टि से भी इसका महत्व बढ़ जाता है।
क्या है मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना?
मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना उत्तराखंड सरकार की ऐसी पहल है, जिसका उद्देश्य सौर ऊर्जा उत्पादन को स्वरोजगार से जोड़ना है। इसके तहत पात्र लाभार्थी निर्धारित नियमों के अनुसार सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर बिजली उत्पादन और उससे आय अर्जित करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। UREDA योजना से संबंधित दिशा-निर्देश, आवेदन दस्तावेज और स्थापित परियोजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराता है।
ओलखसों गांव में प्रस्तावित 200 किलोवाट का सौर ऊर्जा संयंत्र ऐसे समय में स्थापित हो रहा है, जब उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में यह परियोजना गांव के लोगों के लिए आय का नया स्रोत बनने के साथ ही सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अन्य ग्रामीणों को भी प्रेरित कर सकती है।





