पहाड़ की बेटी भागीरथी ने हैदराबाद मैराथन में रचा इतिहास, 42 किमी की दौड़ 2 घंटे 51 मिनट में पूरी कर जीता सिल्वर

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चमोली। उत्तराखंड की बेटियां खेल जगत में लगातार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। इसी कड़ी में चमोली जिले की धाविका भागीरथी बिष्ट ने हैदराबाद मैराथन में शानदार प्रदर्शन कर उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। भागीरथी ने कठिन मानी जाने वाली 42 किलोमीटर की फुल मैराथन को मात्र 2 घंटे 51 मिनट में पूरा कर रजत पदक अपने नाम किया।

पहाड़ की बेटी के इस शानदार प्रदर्शन ने न केवल चमोली बल्कि पूरे उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है। लंबी दूरी की दौड़ में दमदार प्रदर्शन करते हुए भागीरथी ने अपनी फिटनेस, सहनशक्ति और मजबूत इरादों का परिचय दिया।

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42 किलोमीटर की चुनौती को किया पार

फुल मैराथन को एथलेटिक्स की सबसे कठिन प्रतियोगिताओं में से एक माना जाता है। करीब 42.195 किलोमीटर की दूरी को तेज गति से पूरा करने के लिए खिलाड़ियों को लंबे समय तक निरंतर प्रशिक्षण, मानसिक मजबूती और असाधारण शारीरिक क्षमता की आवश्यकता होती है।

भागीरथी बिष्ट ने इस चुनौतीपूर्ण दौड़ को 2 घंटे 51 मिनट में पूरा करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया और सिल्वर मेडल जीत लिया। उनके इस प्रदर्शन ने साबित किया कि सीमित संसाधनों के बावजूद पहाड़ की प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना सकती हैं।

चमोली और उत्तराखंड का बढ़ाया मान

भागीरथी की इस उपलब्धि के बाद चमोली जिले और उत्तराखंड में खुशी का माहौल है। खेल प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने उनके प्रदर्शन को सराहा है। पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित मैराथन में पदक जीतना युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

संघर्ष और मेहनत का मिला परिणाम

लंबी दूरी की दौड़ में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि लगातार अभ्यास और अनुशासन से हासिल होती है। भागीरथी बिष्ट की यह उपलब्धि युवा खिलाड़ियों, विशेषकर पहाड़ की बेटियों के लिए प्रेरणादायक है।

हैदराबाद मैराथन में 42 किलोमीटर की चुनौती को 2 घंटे 51 मिनट में पूरा कर रजत पदक जीतने वाली भागीरथी बिष्ट ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मजबूत हौसले और निरंतर मेहनत से पहाड़ की प्रतिभाएं देशभर में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।