हरिद्वार बासमती चावल: खेत से विदेश तक पहुंचेगा पूसा की खुशबू, 40 हेक्टेयर में शुरू हुई खेती

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हरिद्वार बासमती चावल की खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले में एक नई पहल शुरू की गई है। किसानों की आय बढ़ाने और पारंपरिक धान की खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से भगवानपुर और बहादराबाद ब्लॉक में पूसा बासमती धान की खेती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र के पायलट प्रोजेक्ट के तहत कृषि विभाग ने किसानों को बासमती उत्पादन से जोड़ने की योजना बनाई है। इस पहल से स्थानीय किसानों को बेहतर बाजार और भविष्य में व्यापक व्यापारिक अवसर मिलने की उम्मीद है।

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40 हेक्टेयर क्षेत्र में होगी पूसा बासमती की खेती

हरिद्वार बासमती चावल उत्पादन बढ़ाने के लिए भगवानपुर और बहादराबाद ब्लॉक में कुल 40 हेक्टेयर क्षेत्र का चयन किया गया है। इस क्षेत्र में पूसा बासमती की उन्नत किस्म का धान लगाया गया है।

परियोजना के पहले चरण में 87 किसानों को इस पहल से जोड़ा गया है। किसानों को जिला योजना के बजट से बासमती धान का बीज निशुल्क उपलब्ध कराया गया है, जिससे खेती की शुरुआती लागत कम करने में मदद मिलेगी।

किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर

हरिद्वार में बासमती धान की खेती का विस्तार किसानों के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। सामान्य धान की तुलना में अच्छी गुणवत्ता वाले बासमती चावल की बाजार में अलग पहचान और मांग होती है।

सरकार और कृषि विभाग का उद्देश्य किसानों को ऐसी फसलों की ओर प्रोत्साहित करना है, जिनसे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके। हरिद्वार बासमती चावल परियोजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।

भगवानपुर और बहादराबाद के किसान जुड़े परियोजना से

पायलट प्रोजेक्ट के लिए भगवानपुर और बहादराबाद ब्लॉक को चुना गया है। इन क्षेत्रों में धान की खेती पहले से होती रही है, लेकिन अब किसानों को विशेष रूप से पूसा बासमती की उन्नत खेती से जोड़ा जा रहा है।

कृषि विभाग किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। सही बीज, वैज्ञानिक खेती और उचित प्रबंधन से बासमती उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।

विदेशों तक पहुंच सकता है हरिद्वार का बासमती

बासमती चावल की पहचान उसकी खास खुशबू, लंबे दाने और स्वाद के लिए होती है। भारत में उत्पादित बासमती चावल की देश और विदेश के बाजारों में व्यापक मांग रहती है। ऐसे में यदि हरिद्वार बासमती चावल का उत्पादन और गुणवत्ता बेहतर स्तर तक पहुंचती है, तो स्थानीय किसानों के लिए नए बाजारों के अवसर खुल सकते हैं।

इस पहल से हरिद्वार जिले को बासमती उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान मिलने की भी संभावना है। बेहतर गुणवत्ता और पर्याप्त उत्पादन होने पर किसानों को बड़े व्यापारिक नेटवर्क से जोड़ने का रास्ता आसान हो सकता है।

निशुल्क बीज से किसानों को मिली मदद

परियोजना की एक खास बात यह है कि किसानों को पूसा बासमती का बीज जिला योजना के बजट से निशुल्क उपलब्ध कराया गया है। खेती की शुरुआत में बीज पर होने वाला खर्च किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण लागत होता है।

निशुल्क बीज मिलने से परियोजना से जुड़े 87 किसानों को आर्थिक राहत मिली है। इससे अन्य किसान भी भविष्य में बासमती धान की खेती के प्रति आकर्षित हो सकते हैं।

पायलट प्रोजेक्ट की सफलता पर बढ़ सकता है क्षेत्र

कृषि विभाग की यह पहल फिलहाल 40 हेक्टेयर क्षेत्र में शुरू की गई है। यदि पायलट प्रोजेक्ट के अच्छे परिणाम सामने आते हैं, तो आने वाले समय में हरिद्वार बासमती चावल की खेती का क्षेत्र बढ़ाया जा सकता है।

इससे जिले के अधिक किसानों को बासमती उत्पादन से जोड़ने का अवसर मिलेगा। खेती में विविधता और बाजार आधारित फसलों को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

हरिद्वार के किसानों के लिए नई उम्मीद

पूसा बासमती की खेती का यह प्रयोग हरिद्वार के किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को अधिक लाभकारी कृषि से जोड़ना भी है।

यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो हरिद्वार बासमती चावल भविष्य में जिले की कृषि पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है और स्थानीय खेतों से निकलने वाली बासमती की खुशबू देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सकती है।