India-China Trade के तहत शुरू हुए भारत-चीन (तिब्बत) सीमांत व्यापार में इस बार गंभीर संकट पैदा हो गया है। छह वर्षों के लंबे इंतजार के बाद शुरू हुई व्यापारिक गतिविधियां शुरुआत में ही व्यावहारिक अड़चनों में उलझ गई हैं। तकलाकोट मंडी पहुंचे भारतीय व्यापारी नए माल के अभाव में इंतजार करने को मजबूर हैं, जबकि अन्य व्यापारी भारत में ही अनुमति मिलने की राह देख रहे हैं।
धारचूला से शुरू होने वाले इस पारंपरिक सीमांत व्यापार में व्यापारियों ने कई महीनों से तैयारियां की थीं। लेकिन चीनी प्रशासन की ओर से आगे की अनुमति नहीं मिलने के कारण कारोबारियों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
India-China Trade में क्या है मौजूदा संकट?
भारत-चीन सीमांत व्यापार के लिए पहला दल तिब्बत की तकलाकोट मंडी पहुंच चुका है। इस दल में कुल 20 सदस्य शामिल बताए गए हैं, जिनमें 16 व्यापारी और चार सहायक हैं। हालांकि, दल के पास नया माल नहीं पहुंच पाने के कारण व्यापारिक गतिविधियां अपेक्षित रूप से शुरू नहीं हो सकी हैं।
व्यापारियों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि भारत से नए सामान और शेष व्यापारियों को आगे भेजने की अनुमति अभी तक नहीं मिल पाई है। इसके चलते तकलाकोट पहुंचे व्यापारी दुकानों पर इंतजार करने को मजबूर हैं।
तकलाकोट मंडी में भारतीय व्यापारी परेशान
India-China Trade से जुड़े भारतीय व्यापारियों ने सीमित अवधि में होने वाले इस पारंपरिक व्यापार के लिए लंबे समय तक तैयारी की थी। व्यापार शुरू होने की उम्मीद के साथ व्यापारी तकलाकोट पहुंचे, लेकिन माल की आपूर्ति और आगे की अनुमति में आई बाधा ने उनकी योजनाओं को प्रभावित कर दिया।
बताया गया है कि तकलाकोट पहुंचे व्यापारी नए सामान के अभाव में कारोबार शुरू नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, भारत में मौजूद अन्य व्यापारी भी सीमा पार जाने की अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
170 ट्रेड पास जारी किए गए थे
इस वर्ष सीमांत व्यापार के लिए धारचूला व्यापार कार्यालय की ओर से बड़ी संख्या में ट्रेड पास जारी किए गए थे। जानकारी के अनुसार, 62 व्यापारियों और उनके 92 सहायकों समेत कुल 154 लोगों के लिए व्यापारिक प्रक्रिया से जुड़े पास जारी किए गए।
अन्य आवश्यक प्रक्रिया को मिलाकर कुल 170 ट्रेड पास जारी किए जाने की बात सामने आई है। लेकिन सभी व्यापारियों को सीमा पार जाकर व्यापार शुरू करने का अवसर अभी तक नहीं मिल सका है।
भारत में अटके हैं कई व्यापारी
अनुमति नहीं मिलने के कारण कई व्यापारी अभी भारत में ही मौजूद हैं। व्यापार की सीमित अवधि को देखते हुए उनके सामने समय का दबाव भी बढ़ता जा रहा है।
कारोबारियों का कहना है कि उन्होंने पिछले कई महीनों से व्यापार के लिए तैयारियां की थीं। ऐसे में अनुमति में देरी और माल की आवाजाही प्रभावित होने से व्यापारिक नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
जिला प्रशासन ने विदेश मंत्रालय को भेजा पत्र
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस संबंध में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को पत्र भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
अब व्यापारियों और स्थानीय प्रशासन की नजर इस बात पर है कि दोनों देशों के संबंधित स्तरों पर कब स्थिति स्पष्ट होती है और सीमा पार व्यापार को सामान्य तरीके से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक अनुमति मिलती है।
India-China Trade के भविष्य पर बढ़ी चिंता
छह वर्षों के लंबे अंतराल के बाद India-China Trade के दोबारा शुरू होने को सीमांत क्षेत्र के कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा था। लेकिन शुरुआती चरण में आई बाधाओं ने व्यापारियों की उम्मीदों पर असर डाला है।
तकलाकोट में मौजूद व्यापारी और भारत में अनुमति का इंतजार कर रहे कारोबारी दोनों ही स्थिति के जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। सीमित अवधि वाले इस व्यापार में देरी होने पर कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
व्यापारियों को सरकारों के फैसले का इंतजार
वर्तमान स्थिति में भारतीय व्यापारी आगे की अनुमति और माल की आवाजाही सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। दोनों देशों की सरकारों की ओर से स्थिति को लेकर स्पष्ट समाधान सामने नहीं आने से असमंजस बना हुआ है।
व्यापारियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि प्रक्रिया में देरी जारी रही तो सीमित अवधि के इस पारंपरिक व्यापार का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पाएगा।
सीमांत व्यापार का स्थानीय अर्थव्यवस्था से संबंध
धारचूला और सीमांत क्षेत्रों के लिए भारत-चीन (तिब्बत) व्यापार का आर्थिक और पारंपरिक महत्व रहा है। India-China Trade के तहत होने वाली इन गतिविधियों से कई व्यापारियों और उनके सहायकों की आजीविका भी जुड़ी होती है।
इसी कारण व्यापार शुरू होने के बाद अचानक सामने आई अनुमति और माल आपूर्ति की समस्याओं ने स्थानीय कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। व्यापारी चाहते हैं कि संबंधित स्तर पर जल्द निर्णय लेकर व्यापारिक प्रक्रिया को सामान्य बनाया जाए।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर भारत और चीन के संबंधित प्रशासनिक तथा सरकारी स्तरों पर होने वाले फैसलों पर टिकी है। जिला प्रशासन द्वारा विदेश मंत्रालय को पत्र भेजे जाने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
India-China Trade में पैदा हुआ यह संकट कब समाप्त होगा और तकलाकोट में मौजूद भारतीय व्यापारी कब पूरी तरह व्यापार शुरू कर पाएंगे, यह आने वाले दिनों में होने वाले प्रशासनिक निर्णयों पर निर्भर करेगा।
मुख्य बातें
- छह वर्षों के बाद शुरू हुए भारत-चीन सीमांत व्यापार में नई अड़चन।
- तकलाकोट मंडी पहुंचा पहला भारतीय दल नए माल के अभाव में प्रभावित।
- पहले दल में 16 व्यापारी और चार सहायक शामिल।
- कई व्यापारी अभी भारत में ही अनुमति का इंतजार कर रहे हैं।
- इस वर्ष व्यापार के लिए कुल 170 ट्रेड पास जारी किए गए।
- जिला प्रशासन ने मामले को लेकर विदेश मंत्रालय को पत्र भेजा।
- सीमित अवधि वाले व्यापार में देरी से कारोबारियों की चिंता बढ़ी।
- तकलाकोट में भारतीय व्यापारी आगे के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।




