उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) द्वारा यात्रा को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए जल्द ही नई एसओपी (SOP) जारी की जाएगी। इस बार श्रद्धालुओं के लिए कई नए नियम लागू किए जा रहे हैं, जिनमें मंदिर परिसर और गर्भगृह में फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल है।
इन तिथियों से शुरू होगी चारधाम यात्रा
चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल 2026 से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ होगी।
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22 अप्रैल: केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे
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23 अप्रैल: बदरीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे
अब तक 6.18 लाख से अधिक श्रद्धालु यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके हैं, जो इस वर्ष यात्रा को लेकर बढ़ते उत्साह को दर्शाता है।
मंदिर परिसर और गर्भगृह में मोबाइल पूरी तरह बैन
नई व्यवस्था के तहत बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में गर्भगृह के अंदर मोबाइल ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
इसके अलावा मंदिर परिसर के 50 से 60 मीटर दायरे में भी फोटो और वीडियो बनाने पर रोक लगाई जाएगी।
यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि दर्शन के बाद कई श्रद्धालु मोबाइल से रील और वीडियो बनाने लगते हैं, जिससे अन्य भक्तों को असुविधा होती है।
गैर सनातनियों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध
बीकेटीसी की बैठक में यह निर्णय भी लिया गया है कि समिति के अधीन आने वाले मंदिरों में गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी।
इस फैसले का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं और आस्था की मर्यादा को बनाए रखना बताया गया है।
पूजा शुल्क में 10% तक बढ़ोतरी
चारधाम यात्रा के दौरान विशेष पूजाओं के शुल्क में लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है।
बदरीनाथ धाम (पिछले शुल्क के अनुसार):
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महाभिषेक पूजा: ₹4700 प्रति व्यक्ति
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अभिषेक पूजा: ₹4500
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श्रीमद्भागवत पाठ: ₹51,000
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पूर्ण दिवस पूजा: ₹12,000
केदारनाथ धाम:
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महाभिषेक पूजा (5 व्यक्तियों के लिए): ₹9500
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केदार अभिषेक: ₹7200
श्रद्धालुओं के लिए बेहतर दर्शन व्यवस्था प्राथमिकता
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के अनुसार, समिति का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सरल और सुगम दर्शन कराना है। इसके लिए यात्रा मार्ग, व्यवस्थाओं और नियमों को और बेहतर बनाया जा रहा है।
निष्कर्ष
चारधाम यात्रा 2026 में इस बार सख्त नियमों और नई व्यवस्था के साथ श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव देने की तैयारी है। SOP लागू होने के बाद यात्रा और अधिक व्यवस्थित और अनुशासित होने की उम्मीद है।




